शराब की खरीद पर नहीं देते रसीद, बड़ा खेल है पीछे

उपभोक्ता हितों के लिए सरकार बताती है कि वह गंभीर है। लेकिन शराब उपभोक्ताओं के लिए बिल्कुल नहीं। कोलकाता, दिल्ली, नैनीताल, भोपाल, लखनऊ, गोवा, पांडिचेरी हो या बेंगलुरु या मुम्बई केवल शराब ही बाजार की वह वस्तु है जिसकी खरीद पर रसीद नहीं मिलती है। नहीं दी जाती है। कोई मांगता भी है तो भी नहीं दी जाती है। इस मामले में पूरा भारत एक है।

इसके बावजूद कि उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए कई सख्त नियम भी बनाए गए हैं। इनके तहत ही किसी भी खरीद पर दुकानदार को बिल देना जरूरी है। ये नियम कानून शराब शॉप पर भी लागू होते हैं लेकिन उनका पालन नहीं किया जाता है। हर रोज हजारों की शराब बेचने वाले किसी तरह की रसीद कस्टमर को नहीं देते हैं। अगर किसी ने इस बाबत पूछा भी तो साफ कह देते हैं कि ऐसा कोई नियम उनके लिए नहीं है। रसीद नहीं देने पीछे बड़ा खेल होता है। राजस्व की हेरा-फेरी के साथ ही पब्लिक को चूना भी लगाते हैं।

शराब की रसीद न देने के पीछे दरअसल बड़ा खेल है। बिल जेनरेट नहीं करने से स्टॉक की हेरा फेरी करना आसान हो जाता है। शराब में मिलावट की शिकायत अक्सर सामने आती है इस वजह से भी बिल नहीं देने से बचते हैं शराब दुकानदार। इसीलिए इनके खिलाफ कभी कोई शिकायत दर्ज ही नहीं हो पाती है। बिल या रसीद नहीं मिलने से उपभोक्ता खरीदे गए सामान में किसी तरह की गड़बड़ी की शिकायत नहीं कर सकता रसीद न देने से ही जुड़ा है तय रेट के अधिक वसूलने का खेल भी बहुत दिनों से चल रहा है। रसीद या बिल देने पर यह खेल खराब हो जाएगा। बिल नहीं देने का फायदा उठाकर दूसरे किसी भी प्रदेश की शराब किसी भी स्थान में  बेच देने से कोई रोक नहीं सकता।

दुकानों पर स्वैपिंग मशीन लगाने की कवायद भी हुई लेकिन वाइन शॉप पर सारा लेनदेन कैश है। यहां स्वैपिंग मशीन का कोई इंतजाम नहीं होता है। जबकि वाइन की बोतल कुछ सौ रुपये से लेकर हजारों रुपयों तक की होती है। अगर किसी के पास कैश नहीं है तो उसे वाइन नहीं मिलेगी।

चीयर्स डेस्क

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