सपनो के सैरगाह से सेक्स और बीयर की दुकान तक का सफर

कनेक्शन हाउस के नाम से जाने जा रहे इन समुद्रतटीय घरों में प्रवासियों को बिस्तर, बार और ब्रॉथेल (वेश्यालय) की सुविधा मिलती है। इन प्रवासियों के पास ना आज का कोई ठिकाना है ना कल का। उन्हें तो ये भी नहीं पता कि उन्हें जाना कहां है? ये लोग यूरोप में उमड़ते आ रहे प्रवासियों में शामिल हैं और युद्ध या फिर गरीबी से बचने के लिए मारे मारे फिर रहे हैं।प्रवासियों के अंतराष्ट्रीय संगठन आईओएम के मुताबिक इस साल के शुरुआती छह महीनों में ही यूरोप के तटवर्ती देशों में 55 हजार प्रवासी आ चुके हैं. इनमें से ज्यादातर के पास कोई दस्तावेज नहीं है लेकिन ये लोग घर और नौकरी की उम्मीद में आए हैं।

26 साल की नाइजीरियाई लड़की ग्रेस (बदला हुआ नाम) कहती है, “मैं वही करती हूं जो यहां की बाकी लड़कियां करती हैं। मैं इसे पसंद नहीं करती लेकिन मुझे यह करना पड़ता है। मेरे पास कोई विकल्प नहीं है। कोई नौकरी नहीं है, ना ही कोई ऐसा है जिससे मैं बात कर सकूं या फिर मदद मांगू” ग्रेस यहां देह व्यापार करती है।यह समुद्रतटीय इलाका नेपल्स के उत्तर में करीब 48 किलोमीटर दूर है। अब जर्जर हो चुका यह शहर रोमन साम्राज्य के पहले इट्रस्कन युग का है. 1970 के दशक में भी यह नेपल्सवासियों के लिए गर्मियों में खेलने की जगह थी। 1980 में इस जगह की किस्मत ने करवट ली और इसे भूकंप में बेघर हुए ढाई लाख से ज्यादा लोगों के लिए आपातकालीन घर में तब्दील कर दिया गया। सैलानी यहां से दूर हो गए और अर्थव्यवस्था के साथ साथ यहां की आलीशान इमारतें और खूबसूरत अपार्टमेंट जर्जर होते चले गए। अब वही घर अफ्रीकी प्रवासियों का ठिकाना बन गए हैं।

बेवड़ी हो गई ब्रिटिश प्रिंस की एस्टन मार्टिन कार

स्थानीय मेयर दिमित्री रूसो ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि किस तरह से यहां अनियमित तरीके से 1970 में घरों का निर्माण हुआ। दिमित्री रूसो ने कहा, “हमारे पास करीब 30 हजार कमरे हैं जो अवैध तरीके से बनाए गए और अब यूं ही छोड़ दिए गए हैं।” ज्यादातर घरों में बुनियादी सीवेज जैसी सुविधाएं भी नहीं हैं और ये इंसानों के रहने लायक नहीं हैं। हालांकि इसके बाद भी सागर की लहरों के साथ जंग, भूख या गरीबी से बचने के लिए भाग कर आए प्रवासी यूरोप में एक नई जिंदगी की शुरुआत की उम्मीद लिए इन घरों में बस जाते हैं।

मुख्य सड़क अंटोनियो ग्रामसी से गुजरती एक अंधेरी कच्ची सड़क पर एक घर के पोर्च में हल्की सी रोशनी में एक सिगरेट पीती लड़की दिखाई देती है। हरी पोशाक वाली यह महिला घर की मालकिन है और हर किसी का स्वागत करती है। घर के भीतर छह अफ्रीकी पुरुष एक गोल मेज के चारों तरफ खाली बोतल के साथ बैठे हैं। एक इंसान एक नाइजीरियाई युवती के बालों की लटों को सफेद धागों से सजा रहा है. डाइनिंग रूम के एक तरफ एक खाली बेड भी है जिस पर कुछ खिलौने रखे हैं।कुछ पुरुष यहां सिर्फ गपशप करने या शराब और सिगरेट पीने के लिए आते हैं और कुछ ग्रेस जैसी किसी लड़की की तलाश में, जो 15-20 डॉलर में सेक्स के लिए तैयार हो जाती है। ग्रेस नाइजीरियाई चैनल पर आ रहा एक सीरियल देख रही है। यूरोप में उसकी नई जिंदगी ऐसी नहीं होनी थी। तेल से भरे डेल्टा स्टेट की मूल वासी ग्रेस की आंखों में एक साल पहले तक अच्छे से पढ़ने का सपना था। टूरिन और फिर रोम के अप्रवासी केंद्र में रहने के दौरान उसका पहचान पत्र खो गया। इसके बाद बिना दस्तावेज वाले बेरोजगार अाप्रवासियों के साथ उसे भी कासेल वोल्तुर्नो भेजा दिया गया।

नारों तक ही सीमित है समरस समाज!

नेपल्स का एक गैरसरकारी संगठन इस इलाके में मानव तस्करी के खिलाफ लड़ने की कोशिश कर रहा है। इस संस्था से जुड़ी आंद्रेया मार्निरोली ने कहा, “सारी लड़कियों ने उस आपराधिक संगठन से कर्ज ले रखा है जो इन्हें यहां ले कर आया है.” 2016 में 11 हजार नाइजीरियाई महिलाएं इटली के समुद्र तटों पर आईं। 2017 में यह संख्या घट कर आधी हो गई। यह आंकड़े प्रवासियों के लिए बने एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के हैं। इस संगठन के मुताबिक 10 में से एक महिला सेक्स के लिए तस्करी का शिकार हुई हो सकती है।

अफ्रीकी प्रवासी यहां पहले पहल 1980 के दशक में आए। वे यहां टमाटरों के खेत में मजदूरी करते और यहां के बड़े बड़े घरों में किराए पर रहते थे। साल गुजरते गए और शहर में ऐसे लोगों की भी बड़ी तादाद हो गई जिनके पास दस्तावेज नहीं थे, उनकी नौकरी छूट गई थी और कोई पक्का काम नहीं था।अब शादी कर दो बच्चों की मां बन चुकी प्रोमिस (बदला नाम) 34 साल की हैं। टेलर शॉप में नौकरी का झांसा दे कर एक नाइजीरियाई औरत उसे यहां ले आई थी। प्रोमिस बताती हैं कि किसी तरह वह उसके चंगुल से भाग आई और तस्करी कर लाई महिलाओं की मदद करने वाली ननों की एक संस्था ने उसे आसरा दिया।

ग्रेस कासेल वोल्तुर्नो में बहुत सारे गरीब इटलीवासी भी आने लगे। ये लोग आसपास के शहरों में अपने गुजर बसर लायक कमाई नहीं कर पा रहे थे। नगर कार्यालय के मुताबिक यहां दर्ज लोगों की संख्या 26,300 है जिनमें महज 4,300 ही ऐसे हैं जो इटली के नहीं हैं। शहर में करीब ढाई हजार अफ्रीकी हैं और इनके साथ ही एक छोटी आबादी पूर्वी यूरोपीय देशों की है जिनमें ज्यादातर यूक्रेनी, पोलिश और रोमानियाई लोग हैं। हालांकि मेयर रूसो का कहना है कि वास्तव में यहां 15,000 से ज्यादा लोग रहते हैं जिनके नाम दर्ज नहीं हैं।

कुछ खतरनाक समुद्री रास्तों को पार कर आए हैं तो कुछ कई सालों से इटली में हैं। बहुत से लोगों को तो यहां अफ्रीका से दूर अफ्रीका में रहने का मजा मिलता है. क्योंकि अफ्रीकी लोगों की वजह से खाना, गपशप और माहौल बहुत कुछ अफ्रीका जैसा हो गया है. हालांकि इसके साथ ही नाइजीरिया के कुछ आपराधिक गुट भी यहां जड़ जमाने लगे है।

चीयर्स डेस्क

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