सबसे अधिक टैक्स देने वालों की मौत का जिम्मेदार कौन !

यूपी के बाराबंकी में अवैध देशी शराब पीने से दस लोगों की मौत हो गई। मरने वाले और अस्पताल में बीमार पड़े लोगों ने सरकारी देशी दुकान से शराब खरीद कर पी थी। इस दुकान के मालिक के बारे में कहा जाता रहा है कि यह अवैध देशी शराब की बिक्री करने के लिए कुख्यात रहा है। शराब एक मात्र उत्पाद है जो सरकारी टैक्स के कारण अपनी उत्पादन लागत से तीन गुना से अधिक दाम पर बिकती है।

ज़हरीली शराब पीकर मरने वालों के प्रति संवेदनहीन मीडिया!

यूपी ही क्या लगभग पूरे देश में शराब उपभोक्ता सबसे बड़े टैक्स पेयर हैं। सबसे अधिक टैक्स उन्हीं की जेब से सरकार के खजाने में जमा होता है और सबसे दुखद ये है कि सरकार उनके प्रति सबसे अधिक लापरवाह है। शराब उपभोक्ताओं की जान जब तब अवैध देशी शराब पीने से चली जाती है और सरकार कुछ नहीं करती है। इस साल यूपी सरकार ने करीब 29,302 करोड़ का आबकारी विभाग का राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया है। यानी कि प्रदेश की लाइसेंसी  दुकानों से खरीदकर शराब पीने वाले लोग इतना टैक्स एक साल में यूपी सरकार को देंगे।

अवैध शराब के खिलाफ अभियान के लिए होता है मौतों का इंतजार ?

इन लाइसेंसी दुकानों से शराब पीकर मर जाने पर सरकार टैक्स वसूलने के बावजूद कोई ऐसी कार्रवाई नहीं करेगी कि बाराबंकी जैसी घटनाएं दुबारा न हों। अभी तीन महीने पहले ही तो 114 लोग अवैध जहरीली शराब पीकर मरे है यूपी और उत्तराखंड में, मरने वालों की इतनी बड़ी संख्या के बावजूद सरकार ये नहीं सुनिश्चित नहीं कर पाई कि दुबारा ऐसी घटनाएं न हों। वर्ना बाराबंकी की घटना नहीं होती।

खाकी और खद्दर की मिलीभगत का नतीजा है कच्ची शराब का सिंडिकेट

याद रहे कि करीब तीन महीने पहले इसी साल फरवरी महीने में ही यूपी और उत्तराखंड के चार जिलों जहरीली शराब पीने से 114 लोगों की मौत हुई थी। उसके बाद चुनाव की अधिसूचना लग गई।

ज़हरीली शराब के मृतकों के परिजनों का दर्द बढ़ाता प्रशासन

चुनाव के दौरान भी लगातार खबरें प्रकाशित होती रहीं कि अवैध देशी शराब बड़े पैमाने पर बनाई जा रही है, उसकी आवाजाही के अलावा सरकारी दुकानों से अवैध देशी शराब की बिक्री की खबरें छपती रहीं लेकिन सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया, जिसका नतीजा है कि चुनाव की अधिसूचना समाप्त होने के 24 घंटे के भीतर ही अवैध शराब ने 16 लोगों को लील लिया।  डीएम बाराबंकी के अनुसार मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। मरने वालों में चार एक ही परिवार के लोग हैं।

65 रुपए वाली कासबर्ग बियर मिलती है 190 रुपए में !

सबसे अधिक टैक्स देने वाले शराब उपभोक्ताओं के प्रति सरकार का इतना अधिक उदासीन होना उसकी संवेदनहीनता को प्रकट करता है। एक बियर जो बाजार में 190 रुपए की बिकती है, उसका वास्तविक मूल्य 65 रुपए के आसपास होता है। बाकी राशि टैक्स के रूप में उपभोक्ता देता है। याद रहे कि 375 रुपए देशी शराब पर 252 रुपए से अधिक यूपी सरकार टैक्स लेती है। इतने अधिक टैक्स वूसलने के बाद भी शराब उपभोक्ताओं के साथ इतना सौतेला व्यवहार करती है सरकार।

नए कानून के तहत कब होगी कार्रवाई !

जो लोग मरे हैं उन लोगों ने सरकारी ठेके से ही खरीदी थी शराब। स्पष्ट है कि सरकारी दुकानों से देशी अवैध शराब की बिक्री की जा रही है। इस प्रकार की खबरें चुनाव के दौरान प्रकाशित हुई थीं। यह भी खबरों में आया था कि यूपी सरकार की नई आबकारी नीति में खामियों के कारण ही अवैध शराब की बिक्री सरकारी दुकानों से की जा रही है। लेकिन सरकार ने इस तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दिया।

चीयर्स डेस्क

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