सबसे अधिक कमा रही है शराब से यूपी की सरकार

यूपी सरकार शराब से कमाई करने में नित नए कीर्तिमान गढ़ रही है। सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान 23,918 करोड़ रुपये का उत्पाद शुल्क संग्रह किया है जो 2017-18 के दौरान प्राप्त किए गए 17,320 करोड़ रुपये से 38 प्रतिशत अधिक है। मार्च 2017 में बीजेपी की सरकार के सत्ता में आने के बाद, यूपी की आबकारी राजस्व की वृद्धि दर पिछले दो वर्षों में 21 फीसदी और 38 फीसदी रही जबकि इससे पहले की सरकार के पिछले दो वित्तीय वर्षों में उत्पाद शुल्क संग्रह पांच प्रतिशत गिरा और 2016-17 में 1.4 प्रतिशत कम रहा।

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यूपी सरकार का दावा है की नई उत्पाद नीति, जिसके तहत शराब की तस्करी और शराब सिंडिकेट पर रोक लग सकी है, इसी के कारण राजस्व में बढोत्तरी संभव हो पाई है। दरअसल यूपी में बीजेपी कर सरकार बनने के बाद से ही इस तरफ अधिक ध्यान दे रही है। इस वर्ष 19 मार्च को यूपी की बीजेपी सरकार के दो साल पूरे करने के अवसर पर लखनऊ में मीडिया को संबोधित करते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने संकेत दिए थे कि उनकी सरकार ने राजकोषीय विवेक का पालन किया, जिसके परिणामस्वरूप मजबूत माल और सेवा कर और उत्पाद शुल्क संग्रह किया गया और राजकोषीय घाटे को भी (जीएसडीपी) को भी तीन प्रतिशत के अंदर ही रखा।

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जनवरी 2018 में यूपी सरकार ने शराब सिंडिकेट और बड़े व्यापारियों का संगठित शराब खुदरा क्षेत्र में आधिपत्य समाप्त करने के लिए नई आबकारी नीति की घोषणा की थी। यूपी के स्वास्थ्य मंत्री और सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने तब कहा था कि नई आबकारी नीति शराब के व्यापार में ’पूंजीवाद’ और एकाधिकार पर प्रहार करेगी। उन्होंने पारदर्शिता लाने की बात भी कही थी। उनके अनुसार इसमें सफलता मिलती दिख रही है।

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इसके अलावा शराब की दुकानों की बोली को ऑनलाइन किया जाना अनिवार्य था। यूपी में लगभग 18,000 शराब की दुकानें हैं। अवैध शराब के व्यापार की जाँच करने के लिए, नई नीति में माल की वास्तविक समय सारणी रखने के लिए एक ट्रेस और ट्रैक प्रणाली शुरू की गई है। साथ ही सरकार ने शराब तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए अंतरराज्यीय सीमाओं पर भी चैकसी तेज कर दी है।

चीयर्स डेस्क

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