पाकिस्तान में बनती भी है और पी भी जाती है शराब !

इस्लामी गणरान्य पाकिस्तान, जहां शराब पीना हराम है, पूरी तरह से प्रतिबंधित है। सार्वजनिक स्थानों पर शराब नहीं पी जा सकती। पार्टी, शादी और महफिलों में नहीं पी जा सकती। यह सब कागजी बाते हैं, असलियत यह है कि पाकिस्तान में शराब जम कर पी जाती है। कुल 97 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले इस्लामी देश पाकिस्तान में कानूनी तौर पर मान्यता प्राप्त मरी ब्रेवरी है, जहां शराब बनती है और अगर आपके पास लाइसेंस है तो आप सरकारी दुकान से शराब खरीद कर पी भी सकते हैं।

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’कितने पाकिस्तान’ के लेखक विख्यात हिंदी कथाकार कम्लेश्वर ने पाकिस्तान से लौटकर कहा था कि हिंदुस्तान में शराब दुकानों पर मिलती है जबकि पाकिस्तान में घर घर शराब मिलती है। यह भी मशहूर है कि पूर्वी पाकिस्तान के पतन के बाद, धार्मिक दलों ने सेना के शीर्ष जनरलों पर शराब और महिलाओं के साथ व्याभिचार का आरोप लगाया, जो युद्ध में पाकिस्तान की हार का एक कारण था। नतीजतन, 1974 में, प्रधान मंत्री भुट्टो ने सेना के मेस हॉल में शराब पर प्रतिबंध लगा दिया। इसका सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि सेना के अधिकारियों ने शराब के विकल्प के रूप में अन्य नशों का सेवन करना शुरू कर दिया ।

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लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। बेशक शराब की बिक्री और उपयोग पर पाकिस्तान के लगभग सभी हिस्सों में प्रतिबंध है, लेकिन आप इसे किसी भी अन्य खाने पीने वाली वस्तु की तरह आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। पहली बात तो यह है कि शराब केवल मुसलमानों के लिए प्रतिबंधित है और गैर मुस्लिम इसे आसानी से खरीद कर पी सकते हैं। यह कानून बाजार के लिए है लेकिन काले बाजार में यह आसानी से उपलब्ध है। जो लोग शराब पीते हैं, उन्हें रमजान को छोड़कर कभी भी शराब की अनुपलब्धता की शिकायत नहीं रही। एक अध्ययन के अनुसार, कम से कम 40 फीसदी पाकिस्तानियों ने अपने जीवन में कभी न कभी शराब का सेवन जरूर किया है। तो आप कल्पना कर सकते हैं कि यह कितनी आसानी से हर एक के लिए उपलब्ध है।

द बैटल ऑफ वाइन…यानी क्वालिटी की जंग

यह आश्चर्य की बात है कि गैर मुस्लिमों को ही नहीं मुसलमानों को भी पाकिस्तान में शराब मिल जाती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे कितना खर्च करने को तैयार हैं। गरीब लोग आमतौर पर कच्ची शराब और देसी शराब से ही अपना काम चलाते हैं जो घर पर तैयार की जाती है। दूसरी ओर, एलीट वर्ग है जो थोड़ा अतिरिक्त भुगतान करके लाइसेंस प्राप्त दुकानों से आसानी से शराब खरीद लेता है। इन दुकानों को शराब बेचने से पहले आईडी के लिए पूछना अनिवार्य है ताकि वे यह सत्यापित कर सकें कि वे एक गैर-मुस्लिम को बेच रहे हैं या किसी और को, लेकिन सभी जानते हैं कि यह धंधा कैसे चलता है। कराची में कई सरकारी शराब की दुकानें हैं जो आयातित शराब बेचती हैं और आप की जेब में पैसा है तो कुछ भी संभव है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान में शराब पर किस हद तक प्रतिबंध है।

चीयर्स डेस्क

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