नकली बार कोड से ही तो नहीं बिक रही यूपी में शराब

बाराबंकी शराब कांड के बाद ये स्पष्ट हो गया है कि पूरे यूपी में जितनी भी शराब बिक रही है, उस पर जो बार कोड लगा है, वह असली है, इसकी कोई गारंटी नहीं है। ये बार कोड देशी शराब की बोतलों पर जिस तरह लगते हैं उसी तरह अंग्रेजी शराब की बोतलों पर भी लगते हैं। बाराबंकी के रानीगंज के जिस सरकारी ठेके से लेकर लोगों ने देशी शराब पी थी, उसके पास ही अंग्रेजी शराब का ठेका भी है। दोनों के मालिक या लाइसेंसदार एक ही हैं।

नकली बार कोड और स्टिकर की शिकायतें पहले भी यूपी पुलिस को मिलती रही हैं। यह सूचनाएं भी मिलती रही हैं कि अंग्रेजी शराब की दुकानों पर जो बोतलें मिल रही हैं, उन पर भी नकली बार कोड लगा है। लेकिन इस पर कोई तवज्जो नहीं दी गई। आबकारी विभाग की ओर से इस सम्बंध में कोई पहल नहीं की गई। बाराबंकी कांड के बाद हुई धरपकड़ में पता चला कि जो शराब पकड़ी गई उस शराब की बोतलों में बार कोड भी अलग फैक्ट्रियों से छपवाकर लगाए जा रहे थे।इससे पहले 14 अप्रैल को फतेहपुर तहसील मुख्यालय पर पकड़ी गई फैक्ट्री से ऐसे बार कोड के स्टीकर का बंडल मिला था।

इससे यह साफ हो गया है कि बाराबंकी में एक दो नहीं कई गैंग सरकारी शराब की दुकानों के जरिए नकली शराब बेचने का धंधा कर रहे हैं। वहां के एसपी अजय साहनी ने स्वीकार किया कि मौके से बरामद देशी शराब की शीशी में नकली बार कोड लगाए गए थे। यह देखने में एक जैसे ही हैं। उन्होंने कहा कि इनको छापने वाले स्थल की पहचान का प्रयास किया जा रहा है। जल्दी ही खुलासा कर लिया जाएगा। एसपी ने बताया कि इस बार कोड के कई अन्य जिलों में प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। एसपी के बयान से स्पष्ट है कि यूपी के बाकी जिलों में जो शराब बिक रही है, उस पर लगे बार कोड असली हैं या नकली ये पता कर पाना मुश्किल है। इसका सीधा सा मतलब है कि अन्य शहरों में भी जो शराब उपभोक्ता खरीद कर पी रहा है, वह नकली नहीं है, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

बाराबंकी के एसपी के अनुसार धरपकड़ में सामने आया कि ज्यादातर बार कोड फर्जी थे। जो असली थे भी वह रामनगर द्वितीय दुकान को आवंटित शराब के ठेके के थे। ऐसे में पूरे मामले में शराब के थोक विक्रेता (सीएल टू) की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। उसका लाइसेंस निरस्त करने की सिफारिश की गई है। अभी तक की जांच में पाया गया कि रानीगंज शराब ठेके में जो शराब बेची जा रही थी वो किसी दूसरी दुकान को आवंटित हुई थी। यही खेल पूरे यूपी में नहीं चल रहा है, इस पर यूपी का आबकारी विभाग कुछ नहीं बोलता। नियमतः यूपी के आबकारी आयुक्त को शराब उपभोक्ता के हित का ध्यान रखते हुए यह स्पष्ट करना चाहिए कि बार कोड नकली नहीं हैं लेकिन ऐसा शायद ही संभव हो।

चीयर्स डेस्क

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