नई आबकारी नीति आई तो बिकने लगी गुमटियों में शराब

यूपी में हर जिले में शराब की दुकानों की नीलामी होती है और तय मानक अनुसार ही शराब की बिक्री के आदेश हैं। हमेशा से यही होता रहा है। लेकिन पिछले दो तीन वर्षों से इस स्थापित व्यवस्था में गड़बड़ हुई है। शराब व्यवसाइयों के अनुसार इसका मुख्य कारण नई आबकारी नीति है। इनके अनुसार नई शराब नीति में केवल राजस्व बढ़ाने पर जोर है, इसी कारण कई तरह की विसंगतियां पैदा हो गई हैं।

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इसी का नतीजा है कि पिछले दो तीन सालों में लाइसेंसी शराब की दुकानों से इतर लगभग हर जिले में लकड़ी व टिन की गुमटी में देसी, अंग्रेजी व बियर की दुकानों का संचालन किया जा रहा है। बाराबंकी के रानीगंज के जहरीली शराब कांड के बाद प्रशासन की पड़ताल में  केवल बाराबंकी जिले में ही 40 दुकाने ऐसी सामने आई थीं जो मानक को ताक पर रख संचालित की जा रही थीं। इस पर बाराबंकी जिला प्रशासन की ओर से दो दिन में मानक अनुरूप दुकान  न चलाने पर लाइसेंस  निरस्त करने के आदेश दिए गए। इसके बावजूद अभी भी काफी संख्या में दुकानों का पूर्व की भांति गुमटी में संचालन जारी रहा।

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बारबंकी कांड के बाद देवा के हाजी काजीपुर में गुमटी में  देसी शराब की दुकान चलाए जाने की शिकायत मिली है। ऐसे ही जसनवारा में  तो अंग्रेजी शराब की दुकान टीन की चादर से बनी गुमटी में संचालित पाई गई। हैदरगढ़ तहसील के केसरगंज में भी देसी शराब की दुकान गुमटी में पाई गई। ये सभी दुकानें आवंटन के समय जो मानक तय किए गए हैं उनके अनुसार नहीं हैं।

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बाराबंकी जिला प्रशासन ने इसे दुरुस्त करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया। शराब की दुकानों के मानक, जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता के चेक पॉइंट भी बताए गए। डीएम ने बताया कि सभी तहसील मुख्यालयों पर आबकारी निरीक्षक की तैनाती है। इस सम्बंध में डीएम बाराबंकी ने निर्देश दिए कि वह तहसील मुख्यालय व उसके आठ किलोमीटर की दूरी की सभी शराब, बियर व अंग्रेजी शराब की दुकानों का माह में दो बार व दूरस्थ दुकानों का माह में एक बार जरूर औचक निरीक्षण करे। लेकिन इससे सुधार होगा, इसमें संदेह है। क्योंकि ये केवल बाराबंकी में हो रहा है, बाकी पूरे प्रदेश में इसी तरह की गुमटियों में शराब की बिक्री की जा रही है और सभी जिलों के डीएम ने इस प्रकार के निर्देश नहीं जारी किए हैं।

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इस सम्बंध में सबसेे आश्चर्यजनक स्थिति आबकारी आयुक्त कार्यालय की है। स्वयं आबकारी आयुक्त की ओर से इस प्रकार निर्देश अपने अधीनस्थों को जारी करना चाहिए थे। लेकिन वहां कोई कर्मठता, निष्ठा और कार्य एवं दायित्वों के प्रति संवेदनशीलता नजर ही नहीं आती है। सूत्रों का कहना है कि अगर आबकारी आयुक्त सख्ती से संवेदनशीलता के अनुसार कार्य करें तो इस प्रकार की घटनाएं होंगी ही नहीं।

चीयर्स डेस्क

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