लड़खड़ाते हुए पहुंचे और शतक बनाकर लौटे गैरी सोबर्स

आज ये संभव नहीं है, खिलाड़ियों पर कड़ी निगाह रखी जाती है। उनके खाने पीने पर दस तरह की पाबंदियां हैं। लेकिन तीस साल पहले ऐसा नहीं था। वो दौर ही कुछ और था। वह दौर गैरी सोबर्स जैसों का था। आज भी अगर सर्वकालिक महान आलराउंडर का नाम लेने को कहा जाए, तो बेहिचक गैरी सोबर्स का नाम लिया जाएगा। उन्होंने कभी किसी अनुशासन में बंधना पसंद नहीं किया। उनकी रातें ज्यादातर नाइट क्लबों या महिला मित्रों के साथ बीततीं। ऐसा कई बार हुआ कि वह देर रात तक शराब पीते रहे। सुबह लड़खड़ाते हुए मैदान पर पहुंचे। फिर शतक बनाकर लौटे।

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सोबर्स अब 81 साल के हो चुके हैं। अब वह बारबोडस में मजे़ से जीवन से बिता रहे हैं। वह अपने देश की जीती जागती महान हस्ती हैं और पूरी तरह से वह फिट भी हैं, और अपने तौर तरीकों से ही जिंदगी जीते हैं।

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सोबर्स में जितना टैलेंट कूट कूटकर भरा था, उतनी ही अक्खड़ता भी थी। उन्हें हमेशा ये लगता था कि अगर उनमें बेहिसाब प्रतिभा है तो उन्हें अपनी टीम के सामान्य सदस्यों से अलग ही नहीं समझा जाए बल्कि उनके साथ विशेष व्यवहार भी किया जाए। इसीलिए सोबर्स की अक्सर विंडीज के कप्तानों से बन नहीं पाती थी। टीम के सदस्यों को देर रात तक होटल से बाहर निकलने की मनाही थी लेकिन सोबर्स नियमित तौर पर इस नियम को तोड़ते थे।

नाइट क्लब के शौकीन

सोबर्स देर रात तक नाइट क्लबों में रहते थे, शराब और सुंदरियों की सोहबत में। क्रिकेट हलकों में ये बात फैली हुई थी कि सोबर्स नाइट क्रिकेट के भी खूब शौकीन हैं। यहां नाइट क्रिकेट का मतलब आजकल रात में होने वाले क्रिकेट से नहीं, सुरा सुंदरियों की सोहबत में रातें गुजारने से था। इसके कई चर्चे भी हैं। इनमें से कुछ का वर्णन तो खुद सोबर्स ने अपनी आत्मकथा में किया है।

सोबर्स का फलसफा

ये बात वर्ष 1973 की है। लार्ड्स में वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के बीच टेस्ट मैच चल रहा था। सोबर्स सारी रात होटल में नहीं थे। मैदान पर खेल खत्म होते ही सोबर्स किसी नाइट क्लब की ओर मुड़ गए थे। उनका सीधा सा सिद्धांत था, जिंदगी पूरे आनंद के लिए है। इसलिए इसका पूरा लुत्फ लेकर जिओ। उस रात बाहर रहने के बाद वह भोर में होटल लौटे। सीधे बिस्तर पर लेट गए।

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सुबह उन्हें जल्दी जगा दिया गया। अगले दिन फिर यही हुआ। मैदान से सीधे किसी शराबघर में। रात भर शराब पी गई। इतनी हो गई कि दोस्तों ने उन्हें मैदान पर छोड़ा। मैच शुरू हो चुका था। उनकी टीम बैटिंग कर रही थी। कन्हाई 157 रन पर थे। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज बाब विलिस ने उन्हें कई बार बीट किया। जब कन्हाई आउट होकर लौटे तो सोबर्स को बैटिंग के लिए भेजा गया।

हैंगओवर में शतक

सोबर्स का बुरा हाल हो रहा था। हैंगओवर हो चुका था। सिर घूम रहा था। गेंद सही तरीके से दिख नहीं रही थी। पेट में दर्द भी हो रहा था। पर खेलते रहे। शतक तक पहुंच गए। दर्द असहनीय हो चुका था। वापस ड्रेसिंग रूम लौटना पड़ा। ड्रेसिंग रूम में कप्तान कन्हाई ने ब्रांडी मंगाई। उसे पीते ही दर्द ठीक।

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कई पैग पीने के बाद सोबर्स फिर तैयार। दोबारा क्रीज पर लौटे। 150 रन बनाने के बाद जब आउट हुए तो कन्हाई ने विंडीज की पारी आठ विकेट पर 652 रन पर घोषित कर दी। इंग्लैंड की टीम दोनों पारियों में 233 और 193 रन ही बना सकी। विंडीज ने ये टेस्ट एक पारी और 226 रन से जीत लिया।

चीयर्स डेस्क



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