क्यों आपस में टकराए जाते हैं पीने से पहले गिलास

शराब प्राचीन काल से ही निश्चित रूप से मनोरंजन का एक जबर्दस्त रूप रहा है, और हमारे पूर्वज वास्तव में लगभग एक करोड़ वर्षों से शराब का किसी न किसी रूप में उपभोग कर रहे हैं। एक समूह में पीने के बारे में सबसे अजीब बात ये है कि सभी लोग अपने अपने गिलासों को एक दूसरे के करीब लाकर एक दूसरे से टकराते हैं, यह एक आम प्रचलित परंपरा है जो कि किसी टोस्ट या भाषण के बाद की जाती है। गिलासों के टकराते ही हम चीयर्स, प्रोस्त, स्लैनटे और कम्पाई….हर भाषा में अलग अलग शब्दों का भी इस्तेमाल करते हैं।

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पीने से पहले जाम को या गिलास को आपस में टकराना उन परंपराओं में से एक है जो हम बिना सोचे समझे वर्षों से करते आए हैं। कुछ का दावा है कि यह मूल रूप से राक्षसों को भगाने के लिए था। कुछ का मानना है कि यह विचार आपके शराब पीने वाले साथी के गिलास में थोड़ी सी शराब उड़ेलने के लिए था। इस तरह, वह आपको जहर नहीं दे सकता था और आप सुरक्षित रह सकते थे। जितने रोमांचक ये सिद्धांत हैं, वे शायद उतने ही सच्चाई से परे भी हैं।

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गिलास टकराने का आविष्कार होने से पहले, एक जाम  में चार इंद्रियाँ शामिल थीं, स्पर्श, स्वाद, दृष्टि और गंध। लेकिन जैसे जैसे वाइन गिलास का निर्माण एक कला में तब्दील होता गया, लोगों ने स्ट्रक स्टेमवेयर और वॉयला की बारीक आवाज की सराहना करना शुरू कर दिया और गिलासों के टकराने को टोस्टिंग रूटीन में शामिल कर लिया गया।

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गिलासों का टकराना सामुदायिक एकता की भावना पैदा करता है। पुराने दिनों में, पार्टी में लोग शराब को एक ही बर्तन में एक दूसरे के साथ साझा करते थे और मेजबान सबसे आखिरी में इसका सेवन करता था। आज, हम कीटाणुओं के बारे में थोड़ा ज्यादा चिंतित हैं, और अपने पड़ोसियों के बाद पीने के बजाय, हम हमारे ग्लासों को एक दूसरे से टकराते हुए चियर्स बोलते हैं। देखा जाय तो चियर्स एक ऐसा शब्द है जो लोगों को जोड़ता है और उनमें एकता का भाव पैदा करता है।

चीयर्स डेस्क

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