इटैलियन शराब ने शैम्पेन को छोड़ा पीछे

प्रोसेको दुनिया में सबसे अधिक बिकने वाली स्पार्कलिंग वाइन बन गई है, और विशेषज्ञों का कहना है कि यह शैम्पेन की बाजार में हिस्सेदारी को कम कर रही है। इतालवी शराब उत्पादन ने पांच साल पहले ही शैम्पेन को पीछे छोड़ दिया था और अब यह 544 मिलियन बोतलों के साथ 75% अधिक है।शैम्पेन का अभी भी ,पिछले साल के रिकॉर्ड 4.9 बिलियन यूरो (39000 करोड़ रुपये) बिक्री के आधार पर राजस्व मुकुट पर दावा है । लेकिन प्रोसेको की लोकप्रियता बढ़ती ही जा रही है। इस साल के निर्यात पिछले साल के 804 मिलियन-यूरो (6400 करोड़ रुपये) से 16% अधिक चल रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, शैम्पेन के गृह देश फ्रांस में 40%  बिक्री में बढ़ोतरी हुई है और ये आंकड़े क्रिसमस में हुई बिक्री को नहीं दर्शाते हैं।माइकल एडवर्ड्स, एक विशेषज्ञ जो डीकांतर पत्रिका के लिए एक वाइन जज रहे हैं और उन्होंने ‘द फाइनेस्ट वाइन्स ऑफ़ शैम्पेन ‘ पुस्तक लिखी है, कहते हैं कि उपभोक्ताओं को स्पार्कलिंग वाइन में दिलचस्पी है।

इटैलियन प्रोसेको की सफलता का श्रेय इसकी कम कीमत और इसके प्रोफाइल को दिया जाता है, जिससे यह ग्रेट ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका और जर्मनी में लोकप्रिय हो गई है, ऐसे बाजार जहां शैम्पेन लंबे समय तक फली फूली हैं।मैरीलैंड के बाल्टीमोर में एक चिकित्सा उपकरण कंपनी के सलाहकार जोविन लीपर कारबेरी ने चार साल पहले समुद्र तट पर प्रोसेको का सेवन किया , और उन्हें यह इतनी पसंद आई कि उन्होंने अपने पूल में दोस्तों के लिए इससे स्मूदी बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने पिछले चार साल से, नए साल की पूर्व संध्या के लिए शैम्पेन की जगह प्रोसिको का इस्तेमाल किया।उन्होंने कहा “समुद्र तट पर इसे आजमाने का मेरा प्रारंभिक कारण यह है कि यह शैम्पेन की तुलना में कम खर्चीली थी । अब मैं इसका इस्तेमाल करती हूं क्योंकि मैं इसे शैम्पेन से ज्यादा पसंद करती हूं”।

शराब वहीं ज्यादा बिकती है, जहां गरीबी अधिक है

इसकी कम कीमत एक सरल उत्पादन विधि द्वारा संभव हो पाई है। इसमें किण्वन की दो प्रक्रियाएँ बड़े टैंकों में की जाती हैं , जबकि शैम्पेन की दूसरी किण्वन अवधि तब होती है जबकि वाइन बोतलबंद होती है।इसमें शैम्पेन की बोतलों को एक कोण पर स्टोर करने और उन्हें हर दिन थोड़ा मोड़ने की आवश्यकता होती है। हजारों बोतलों पर किए जाने वाले किण्वन – महंगे मैनुअल श्रम की मदद से की जाती है।प्रोसेको के उत्पादक अपनी शराब की सफलता से खुद भी अचंभित है। वे न केवल नकल करने वालों के खिलाफ हैं, बल्कि स्पेन की कावा जैसी अन्य स्पार्कलिंग वाइन जो अभी भी वैश्विक बिक्री के मामले में प्रोसेको को टक्कर नहीं देती हैं, और जर्मनी की सेक्ट, विशेषषज्ञों के अनुसार इसकी गुणवत्ता में सुधार हुआ है।प्रोसेको की बढ़ती लोकप्रियता, और सामान्य रूप से युवा शराब पीने वालों द्वारा स्पार्कलिंग वाइन का प्रसार, शैम्पेन निर्माताओं को अपने कारोबार कि कार्यशैली  बदलने पर मजबूर कर रहा है।

चीयर्स डेस्क

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