हर कांड में बच जाता है मौत का सौदागर, पीछे कौन है?

अवैध शराब से जब तब होने वाली मौतों के पीछे यूपी के आबकारी विभाग के बड़े अधिकारी भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। बाराबंकी में अवैध जहरीली अवैध शराब व्यवसाय के साथ ही दूसरे राज्यों की शराब बाराबंकी समेत आस पास के जिलों में खपाने का मास्टर माइण्ड भले ही कोई और हो लेकिन परोक्ष रूप में जिस व्यक्ति के बारे में कहा और बताया जा रहा है। उस पर कभी कोई आंच नहीं आती है या आने नहीं दी जाती है। क्या इसके पीछे यूपी के आबकारी विभाग के बड़े अधिकारी हैं। क्या इन अधिकारियों की बदौलत ही कई बार मीडिया द्वारा इसे प्रमुखता से उठाए जाने के बावजूद भी इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है।

चीयर्स डाॅट काॅम को मिली जानकारी के अनुसार इस व्यक्ति की पहुंच इतनी जबर्दस्त है कि आबकारी विभाग के गोपनीय कार्यों तक को इसकी मर्जी से ही अंजाम दिया जाता है। इसीलिए बीते करीब तीन दशकों से इस व्यक्ति को इस कारोबार में शामिल होने के बावजूद कोई हिला नहीं पाया है। यह वही व्यक्ति है जो कभी आबकारी विभाग में सिपाही था। बाद मंे सहायक निरीक्षक बना, इसके खिलाफ दर्जनों बार शिकायतें हुईं। लेकिन मामले में न तो जिला प्रशासन ने मोटी मलाई के चलते इसे संज्ञान में लिया और न ही विभाग के दूसरे बड़े अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया।

यह वही व्यक्ति है जिस पर पत्रकारों को भी मारने पीटने की शिकायत है। इसके बावजूद भी आबकारी विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। करीब छह माह पहले जब इसकी शिकायत डीएम से भी की गई थी तब भी मामले में फैजाबाद से जांच करने आए अधिकारियों ने आबकारी कार्यालय में बैठे बैठे ही जांच कर मामला ठण्डे बस्ते में डाल दिया था।

सूत्रों का कहना है कि इसी का परिणाम है कि बाराबंकी में अवैध देशी शराब का धंघा व्याप्त गोरखधंधा है। अपनों को बचाने की इतनी चिंता है कि रानीगंज कांड के बाद आबकारी विभाग को विभागीय हरकत में रामसनेहीघाट पहुंचे आबकारी अधिकारियों व सिपाहियों ने अपनी नाम प्लेट तक हटा रख थी। इन लोगांे से बातचीत में भी यह बात सामने आई कि तैनाती लखीमपुर में होने के बावजूद बाराबंकी में ही इसके जमे रहने की बात आबकारी आयुक्त तक को है लेकिन कोई कार्रवाई न हुई और न होने की उम्मीद है।

चीयर्स डेस्क

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