गुजरात ने शराबबंदी के बदले केंद्र से मांगे 15000 करोड़

गुजरात सरकार ने राज्य में शराब की बिक्री पर रोक की वजह से होने वाले सालाना लगभग 15000 करोड़ के नुकसान का हर्जाना केंद्र से मांगा है। गुजरात सरकार का कहना है कि शराब बंदी के कारण हर साल लगभग पंद्रह हजार करोड़ के राजस्व के नुकसान की भरपाई केंद्र को करनी चाहिए। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने शराबबंदी के चलते राज्य को एक्साइज और वैट सहित मदों में राजस्व नहीं मिलने की वजह से लगभग 15 हजार करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई के लिए हर्जाने की मांग केंद्र से की है।

बिना कुछ किए ही यूपी सरकार की कमाई बढ़ रही शराब से

बजट से पहले वित्त मंत्रालय द्वारा बुलाई गई बैठक में उप मुख्यमंत्री पटेल ने यह मुद्दा उठाया। यह बैठक केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने आयोजित की थी। नितिन पटेल ने कहा कि गुजरात के समकक्ष जो राज्य हैं, उन्हें शराब बिक्री से एक्साइज-वैट सहित करों की मद 12 से 15 हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है लेकिन गुजरात इससे वंचित रह जाता है। क्योंकि गुजरात में शराबबंदी है।
गुजरात के उप मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 47 के उद्देश्य को सफल बनाने के लिए गुजरात ने शराबबंदी की व्यवस्था को स्वीकार कर लागू किया लेकिन इसके चलते राज्य को जो नुकसान होता है, उसकी भरपाई केंद्र सरकार को करनी चाहिए।

बाराबंकी शराब कांड के बाद जागी यूपी सरकार

गौरतलब है कि गुजरात राज्य में एक मई 1960 से शराबबंदी लागू की गइ। इसके अंतर्गत कोई भी व्यक्ति गुजरात में न शराब खरीद सकता है और न ही रख सकता है। बेचना भी प्रतिबंधित है। याद रहे कि गुजरात की शराबबंदी को लेकर जब तब आवाजें उठती रहती हैं। गुजरात हाईकोर्ट में भी कई रिट पिटीशन दायर की जा चुकी हैं जिनमें कहा गया है कि शराब बंदी के कानून को थोड़ा शिथिल किया जाना आवश्यक है। गुजरात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जन्म स्थली है, बापू का साबरमती आश्रम भी गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में है। बापू शराबबंदी के जबर्दस्त हिमायती थी, इसी कारण गुजरात में शराबबंदी लागू की गई है।

शराब से धन कमाने में लखनऊ मंडल टाॅप पर, नंबर दो मेरठ

मीडिया के सूत्रों के अनुसार इस बैठक में पटेल ने कहा कि गुजरात आर्थिक अनुशासन वाला प्रगतिशील राज्य है। पिछले 20 वर्षों में इस राज्य को ओवरड्राफ्ट नहीं लेना पड़ा, न ही कभी अल्पकालिक ऋण लेने की नौबत आई। उन्होंने कहा कि गुजरात को अधिक प्रोत्साहन देने के लिए केंद्र सरकार को अधिक ग्रांट देना चाहिए।

अंग्रेजी में भी मिलावट, बाजार भाव से सस्ती बेचते थे

इसी सिलसिले में न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात के उप मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत मिलने वाली ग्रांट को भी बढ़ाने का भी आग्रह किया। पटेल ने कहा, ‘पीने योग्य पानी की पर्याप्त सप्लाई की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने बड़े पंपिंग स्टेशनों के अलावा पीने के पानी के लिए उचित नेटवर्क तैयार किया है।’ उप मुख्यमंत्री ने बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए पेंशन के अलावा आंगनवाड़ी कामगारों और मिड डे मील योजनाओं के कर्मचारियों के लिए मानदेय बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। इस बैठक में रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास, वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग भी शामिल थे।

चीयर्स डेस्क

loading...
Close
Close