गंदे पैरों से कुचली भुजिया बनती है शराब की साथी

शराब और नमकीन भुजिया का चोली दामन का साथ है। जहां शराब वहां भुजिया भी पाई ही जाती है। ऐसे शराब उपभोक्ता कम ही निकलेंगे जो शराब के साथ नमकीन भुजिया को हाथ न लगाएं। लेकिन ये भुजिया जो खूबसूरत एयरटाइट पैकटों में शराब के साथ सर्व की जाती है वह बनती कैसे है, गंदे पैरों से कुचल कर…इससे अधिक कहा और सुना नहीं जा सकता क्योंकि मन खराब हो जाएगा।

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वैसे तो राजस्थानी भुजिया पूरे विश्व में प्रसिद्ध है और पूरे राजस्थान में भुजिया का निर्माण कुटीर उद्योग का दर्जा रखता है लेकिन राजस्थान का बीकानेर भुजिया निर्माण के बड़े केंद्र के रूप में सबसे अधिक विख्यात है। क्योंकि बीकानेरी भुजिया वर्षों से पूरे देश में बिकती रही है और पिछले दशक में इसकी अत्याधुनिक पैकिंग के कारण इसका कुरकुरा पन नहीं जाता, सीली सीली नहीं लगती। पैकेट खोलते ही एकदम ताज़ा होने का अहसास कराती है इसीलिए वह बाजार पर छा गई।

 

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लेकिन बीकानेर में भुजिया बनाने की जो छोटी छोटी फैक्ट्रियां चल रही हैं, उनमें  कैसे बनती है भुजिया, इसे देख कर होश उड़ जाते हैं कि कितनी गंदगी में बनती है ये जिसे हम प्लेट में बड़े शान से सजा कर सर्व करते हैं। चीयर्स डाॅट काॅम को भुजिया निर्माण के दौरान के कुछ ऐसे फोटो हाथ लगे हैं जिनसे साबित होता है कि भुजिया निर्माण में बिल्कुल भी सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता।

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भुजिया के निर्माण के बाद उसकी पैकिंग के लिए भुजिया के ढेर पर गंदे  पैरों से मजदूर और लेबर चल रहे हैं। भुजिया को रौंद रहे हैं और उसी भुजिया को पैक भी कर रहे हैं। औरतें, बच्चे सब लगे हैं इसकी पैकिंग में और सबके हाथ पैर गंदे हैं। पैकिंग के लिए न तो कोई एप्रेन पहने है न ही कोई ग्लब्स या दस्ताने। पैकिंग करने वाले किसी भी व्यक्ति के सिर पर प्लास्टिक कैप भी नहीं है। पैकिंग के लिए काम करने वाले सभी कर्मचारियों की एक ड्रेस होनी चाहिए जो पूरी तरह से डिसइन्फेक्टेड हो। लेकिन यहां इस प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं है।

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राजस्थान सरकार और बीकानेर जिला प्रशासन के अधिकारी इस व्यवस्था से वाकिफ हैं कि भुजिया फैक्ट्रियों में सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। लेकिन किसी कारखाने के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।

चीयर्स डेस्क

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