फिल्मी हीरो को पीता देख बच्चे पीना जल्दी सीख लेते हैं

हॉलीवुड हो या बाॅलीवुड, फिल्मों में हीरो जब शराब की चुस्कियां ले रहा होता है तो उसे पता नहीं होता कि उसे देखने वाले कितने लाखों लोग उसके इस सीन से कितना प्रभावित हो रहे होते हैं, खासकर बच्चे। किशोर मन सबसे पहले शराब के प्रति आकर्षित होता है जब वह अपने हीरो को पीते देखता है।
अमेरिका में एक स्टडी में दावा किया गया है कि किशोरावस्था में बच्चे फिल्मों में शराब पीने के सीन से ज्यादा आकर्षित होते हैं। इस स्टडी का कहना है कि अगर उनके मां बाप शराबी हों, तो भी उतना फर्क नहीं पड़ता, जितना फिल्मों में शराब के सीन को देखने से पड़ता है।

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स्टडी ग्रुप का कहना है कि इस रिसर्च में बेहद सावधानी और संवेदनशीलता से काम लिया गया है। 10 से 14 साल के 6500 बच्चों का टेलीफोन पर इंटरव्यू किया गया और दो साल के भीतर उनसे तीन तीन बार अलग अलग समय पर बात की गई। इनसे पूछा गया कि क्या वे बड़ी फिल्में देखते हैं और क्या उसमें शराब के सीन को देखते हैं। उनसे यह भी पूछा गया कि क्या उन्होंने शराब को चखा है और वे स्कूल में किन बातों पर ध्यान देते हैं।

इन इंटरव्यू में जिन 50 फिल्मों के नाम लिए गए, उन्हें 500 फिल्मों की सूची में से रैंडम चुना गया था। इनके अलावा 32 दूसरी फिल्मों के बारे में भी पूछा गया, जिन्होंने अच्छा खासा बिजनेस किया था। रिसर्चरों ने इसके बाद फिल्मों में बारीकी से देखा कि किस स्तर पर शराब को दिखाया गया है और अभिनेता कितनी शराब पीता है।

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रिसर्च में नतीजा निकला कि किशोरों ने औसत तौर पर इन दृश्यों को साढ़े चार घंटे तक देखा। कुछ ने तो आठ घंटे से भी ज्यादा ऐसे दृश्यों को देखा, जिसमें शराब का जिक्र हो रहा हो। दो साल तक चली इस रिसर्च में पता चला कि शराब पीने वालों का प्रतिशत 11 फीसदी से बढ़ कर 25 फीसदी हो गया। जिन लोगों ने यूं ही चखने के लिए शराब पीना शुरू किया था, वे तीन गुना ज्यादा पीने लगे।

फिल्मों में देख कर शराब पीने को शराबी बनने की प्रक्रिया में तीसरा सबसे बड़ा खतरा बताया जाता है, जबकि किसी को पियक्कड़ बनाने में इसे चैथा सबसे अहम कारक बताया जाता है। रिसर्च में कहा गया है कि अगर किसी के मां बाप शराबी हों या किसी के पास पॉकेटमनी के तौर पर खूब ज्यादा पैसे हों, तो भी उनके इस तरह के शराबी बनने की संभावना नहीं रहती, जैसा कि फिल्मों में शराब के दृश्यों को देख कर होती है। रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया, जिन बच्चों ने शराब वाली फिल्मों को देखा था, वे दूसरे बच्चों के मुकाबले दोगुनी संख्या में शराब पीने लगे। इनमें से 63 प्रतिशत पियक्कड़ बनने की राह पर निकल गए।

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रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि फिल्मों में शराब का प्रचार अच्छे दृश्यों में होता है, इससे कोई नुकसान नहीं होता है और ज्यादातर बार शराब की कंपनी भी दिखती है, जो किशोरावस्था के बच्चों पर बुरा असर डालता है। यह रिसर्च बीएमजे ओपन पत्रिका में प्रकाशित हुई है। न्यू हैंपशायर यूनिवर्सिटी के डार्टमाउथ मेडिकल स्कूल में पढ़ाने वाले जेम्स सार्जेंट की अगुवाई में यह रिसर्च की गई। उन्होंने सेहत के लिए काम करने वाली एजेंसियों से कहा है कि उन्हें इस पर चिंता जतानी चाहिए।

चीयर्स डेस्क

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