दो तिहाई भारतीय युवाओं को शराब पीने पर एतराज़

दुनिया भर के युवाओं में शराब पीने का चलन बढ़ रहा है लेकिन भारत में युवा शराब पीने को बुरा मानते हैं बल्कि कहते हैं कि शराब के बिना भी की जा सकती है पार्टी। जबकि रेव पाटिर्यों या पबों में जाना और मौज मस्ती के लिए शराब पीना दुनिया भर में शिक्षित युवाओं में फैशन और रूतबे का प्रतीक बन चुका है। लगभग दो तिहाई भारतीय युवाओं ने शराब पीने का विरोध करते हुए कहा है कि शराब को सामाजिक रूप से स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। हाल ही में प्रकाशित एक नई किताब के अनुसार लगभग दो तिहाई भारतीय युवा शराब से इनकार करते हुए पीने को सही नहीं मानते हैं। बदलते विश्व में भारतीय युवाओं की धारणा और दृष्टिकोण नामक इस किताब में राष्ट्रीय स्तर पर देश के पांच हजार युवाओं का मौखिक सर्वे किया गया। इस सर्वे में वर्तमान में देश के भविष्य माने जाने वाले युवाओं की आधुनिक सोच को जानने की कोशिश की गई। इस किताब के लेखक पीटर रोनाल्ड डिसूजा, संजय कुमार और संदीप शास्त्री के अनुसार किताब में भारतीय युवाओं ने कई विषयों जैसे आधुनिकता, विकास, भूमंडलीकरण, जीवनशैली, बेरोजगारी, सामाजिक नेटवर्क और परिवार सहित अपने भविष्य के सपनों और आकांक्षाओं पर अपनी राय दी है।

लखनऊ के आमों से बनी वाइन जल्दी ही बाजार में

सेज प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस किताब में 64 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि शराब पीने को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए जबकि हर दस युवाओं में एक युवा ने शराब पीने को सही माना है। इसके अलावा 15 प्रतिशत ऐसे युवा हैं जो मानते हैं कि सामाजिक हलकों में अपनी जगह बनाने के लिए न चाहते हुए भी शराब पीना जरूरी हो जाता है। इन युवाओं में दस प्रतिशत ने इस बारे में कुछ नहीं कहा। लेकिन यह स्पष्ट है कि शराब पीने के प्रति युवाओं के दृष्टिकोण में बदलाव आया है। शराब पीने के चलन के प्रति उनके दृष्टिकोण पर युवाओं के शैक्षिक संस्थानों, निवास की जगह और लिंग का भी प्रभाव पड़ता है।

विरोध में लड़कियां ज्यादा
इस किताब के लेखक के अनुसार लड़कियां युवा लड़कों की अपेक्षा शराब पीने की ज्यादा विरोधी हैं। लगभग तीन चैथाई लड़कियों ने माना कि वे शराब पीने का विरोध करती हैं, जबकि केवल आधे युवा लड़कों ने उनकी बात का समर्थन किया। दस में दो युवकों का कहना था कि सामाजिक दायरे में अपनी जगह बनाने के लिए शराब पीना जरूरी है। दूसरी तरफ दस लड़कियों में केवल एक लड़की का ऐसा मानना था। यह संख्या बताती है कि किस तरह महानगरों में रहने वाले शिक्षित युवाओं में शराब पीने के प्रति सोच घटी है।

गुजरात ने शराबबंदी के बदले केंद्र से मांगे 15000 करोड़

इस मामले में सबसे दिलचस्प बात ये है कि ऊंची शिक्षा प्राप्त युवाओं में शराब पीना दूसरे युवाओं की तुलना में ज्यादा स्वीकार्य है। पेशेवर डिग्री लिए देश के लगभग बीस प्रतिशत युवाओं ने शराब पीने को सही माना है। साथ ही बीस प्रतिशत शहरी युवाओं का कहना है कि पार्टियों में अपनी जगह बनाने और लोगों से जुड़ने के लिए शराब पीना जरूरी है। शहरों में रहने वाले छह युवाओं में एक युवा मानता है कि शराब पीना सही नहीं है।

शिक्षित और प्रोफेशनल युवाओं का कहना है कि सामाजिक सरोकार और पार्टियों में अपनी जगह बनाने के लिए पीना ज्यादा जरूरी है। भारत के युवा बहुलवादी आकाक्षांओं के साथ नए और पारम्परिक मूल्यों के बीच सामंजस्य करते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। इस बदलते परिवेश में उनके व्यवहार और मूल्यों में कई बदलाव दिखे है। शराब पीने का विरोध करना ऐसे ही बदलाव का प्रतीक है।

चीयर्स डेस्क

loading...
Close
Close