भूटानी पानी वाली टेस्टी देशी बियर भारत आने को तैयार

भूटान के पानी में कोई खास बात है कि वहां जो बियर बनती है उसका टेस्ट अच्छा होता है। वहां अगर बियर कम्पनियां बियर बनाने लगीं तो भारत के बाजार में उनका वर्चस्व भी हो जाएगा। क्योंकि भारत में कम्पनियां बियर प्लांट लगाने से बच रही हैं, कारण यहां की ब्यूरोक्रेसी। बाजार जरूर बड़ा है लेकिन कारोबार की संभावनाएं यहां उतनी नहीं हैं। अब एक नई बात भी सामने आ गए है, वह है भूटान का पानी।

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तो कई विख्यात बियर कंपनियां बीयर बनाने के लिए जो पानी चाहिए होगा, उसकी तलाश के लिए भूटान की तरफ रुख कर रही हैं। इन्हें वहां का पानी बियर बनाने के लिए अधिक उपयोगी लग रहा है। इन कंपनियों को लगता है कि वहां के प्राकृतिक झरने के पानी से अपने ब्रांड को दूसरों से अलग बनाने में मदद मिलती है। इससे उनके प्रॉडक्ट को अच्छी कीमत भी मिलती है।

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अल्फा और कटी पतंग जैसी कंपनियां ’मेड इन भूटान’ बियर बेचना शुरू भी कर चुकी हैं जबकि सिंबा, तइवत ब्रुइंग कंपनी और वाइट राइनो वहां पैर जमाने की कोशिश कर रही हैं। देश की क्राफ्ट बीयर इंडस्ट्री पहले भी खासतौर पर हेफेजाइन और विटबियर जैसी गेहूं बीयर कैटिगरी के जर्मनी और बेल्जियम जैसे देशों का रुख कर चुकी हैं। भारत का क्राफ्ट बियर मार्केट ओवरऑल डोमेस्टिक बियर इंडस्ट्री का तकरीबन दो तीन फीसदी है।

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इन कम्पनियों का कहना है कि क्राफ्ट बीयर के कॉन्ट्रैक्ट ब्रुइंग और बॉटलिंग इंडियन मार्केट के बजाय भूटान में लाइसेंस लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। अल्फा ब्रैंड की मालिक पंजाब की मैडमैक्स ब्रुइंग कंपनी के अभिषेक दहिया का कहना है, ‘भारत में बियर फैक्टरी लगाने में काफी परेशानी होती है। इसका लाइसेंस काफी महंगा होता है। मंजूरियों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के अलावा अधिकारियों से भी डील करनी पड़ती है। वहीं, भूटान में सारी प्रक्रिया चंद घंटों में ही पूरी हो जाती है। अगर यूरोप और ब्रिटेन से तुलना करें तो वहां से शिपमेंट्स में दो महीने लग जाते हैं। भूटान में कारोबार शुरू करने का मतलब है कि यह समय भी बचेगा।

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भूटान के किंजोर ब्रुअरी के साथ बेहतर तालमेल से दहिया का हौसला काफी बढ़ गया है। उन्हें भरोसा है कि वह जून तक पोर्टफोलियो में एक और वेरिएंट जोड़ने के साथ अगस्त तक हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तर पूर्व में डिस्ट्रीब्यूशन का विस्तार कर लेंगे। भूटानी बियर का टेस्ट भी बेहतर होता है। चूंकि, इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, इसलिए मैन्युफैक्चरर्स अपने प्रॉडक्ट्स को दूसरी कंपनियों से अलग बनाने के लिए भूटान में उत्पादन शुरू कर रहे हैं। बॉटल्ड क्राफ्ट बियर ब्रांड कटी पतंग ने सात महीने पहले दिल्ली में अपना कारोबार शुरू किया था, वह हंगसो में सेर भूम ब्रुअरी में एंबर एल बना रही है। इसकी अगले दो महीनों में भूटान के बाद मुंबई और बेंगलुरु में डिस्ट्रीब्यूशन का विस्तार करने की योजना है।

चीयर्स डेस्क

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