भारत के बाजारों में जल्द छा जाएगी विदेशी जौ की बियर

इन गर्मियों के लिए बियर कम्पनियों ने भारत के बाजार में कुछ विशेष करने की योजना तैयार की है। उसका असर दिखने भी लगा है और दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक, डाॅट बियर, क्राफ्ट बियर का क्रेज दिखने लगा है। कम्पनियों ने इस बार बियर की क्वालिटी पर भी ध्यान दिया है और इस सीजन में इंपोर्टेड बार्ली यानी जौ का इस्तेमाल कर सकती हैं। दरअसल, इंडिया में जौ के उत्पादन में सालाना आधार पर कमी आई है।

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बियर बनाने वाली कम्पनियों का कहना है कि 60 हजार टन जौ से लदा एक जहाज अर्जेंटीना से इंडिया आ चुका है और दूसरा रास्ते में है। आने वाले समय में जौ का आयात बढ़ने की भी संभावना जताई जा रही है। इनका कहना है कि इस साल देश में जौ का उत्पादन पिछले साल से 19.2 लाख टन कम रहने का अनुमान है। इसमें ड्यूटी फ्री इंपोर्ट एक्युअल यूजर्स के लिए है। माल्टिंग इंडस्ट्री भी बड़े पैमाने पर जौ का आयात कर रही है।

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इंडिया में माल्ट एक्सट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग फर्म बारमाल्ट माल्टिंग कंपनी के एमडी प्रमिल जिंदल ने इस सम्बंध में बताया कि मंडियों में जौ की फसल की आवक को देखते हुए हमें इस साल कम पैदावार होने की आशंका हो रही है। जौ के उत्पादन में इस साल करीब दस फीसदी की कमी आ सकती है। इस हिसाब से मक्का और बाजरे की कीमत ज्यादा होने से पशु आहार उद्योग भी ज्यादा जौ की खरीदारी कर रहा है। इसके चलते जौ का भाव चढ़ा हुआ है। माल्टिंग इंडस्ट्री को बीयर और डिस्टिल्ड बेवरेजेज के लिए पांच से छह लाख टन जौ की जरूरत होती है। जौ का उपयोग हॉर्लिक्स, बॉर्नविटा और बूस्ट जैसे फूड सप्लीमेंट्स, ब्रेड और दूसरे पशु आहार में भी होता है।

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एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी के अनाज व्यापारी ने बताया कि आयातित जौ की गुणवत्ता बेहतर है और कंपनियां विदेशी जौ के लिए घरेलू बाजार से 10 फीसदी ऊंचा भाव दे रही हैं। कंपनी गेट पर इंपोर्टेड जौ की औसत कीमत 1,950-2,000 रुपये प्रति क्विंटल चल रही है, जबकि देसी जौ का भाव 1,875-1,900 रुपये प्रति क्विंटल लगाया जा रहा है। कम्पनियों के सूत्रों का कहना है कि माल्टिंग कंपनियों को एक बार में बड़ी मात्रा में जौ की खरीदारी से फायदा होता है। ट्रेडर्स इंडियन कंपनियों की तरफ से अगले क्वॉर्टर में 50 से 60 हजार टन जौ से लदे पांच या छह जहाज के लिए ऑर्डर आने की उम्मीद कर रही हैं।

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हालांकि घरेलू बाजार में नई फसल की आवक पीक पर है और यूनाइटेड ब्रेवरीज, बारमाल्ट, ग्लेनकोर, लुई ड्रेफस, कॉफ्को और कारगिल जैसी सभी बड़ी कंपनियां राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर जौ की खरीदारी कर रही हैं। लेकिन फिर भी बियर की मांग के अनुपात में जौ की आवक कम है। इसलिए विदेशी जौ को आयात किया जा रहा है। इस तरह भारत के बाजारों में विदेशी जौ की बियर भी जल्दी ही मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

चीयर्स डेस्क

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