बंदर भी जम कर पीते हैं शराब

बंदर भी आदमी की ही तरह शराब पीते हैं और आदमी से ज्यादा हुड़दंग मचाते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि आदमी पीने के बाद गड़बड़ करते हैं तो बंदर नहीं मिलने पर हंगामा काट देते हैं। कुछ तो इतनी पीते हैं कि इसके बिना रह नहीं सकते। शराब की दुकान के आस पास ही मंडराते रहते हैं। वहीं पर उछल कूद मचाते रहते हैं। नहीं मिलती है तो तोड़ फोड़ पर आमादा हो जाते हैं। दुकानदार मजबूरन इन्हें पीने को दे देते हैं।

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फारेन लिकर के गोदाम के आस पास इन बंदरों को बड़ी आसानी से देखा जा सकता है। ये वही बंदर होते हैं जिन्हें रोज शराब चाहिए। इन गोदामों के रजिस्टर में इन बंदरों को दी जाने वाली शराब की पेटियों का ब्यौरा भी दर्ज होता है। पूर्वी यूपी के कई शहरों के एफ एल-2 गोदामों के हिसाब किताब में औसतन हर साल करीब दस पेटियां इन बंदरों को दिए जाने की बात लिखी होती है।

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इन गोदामों के प्रबंधकों से जब चीयर्स डाॅट काॅम के संवाददाता ने इस सम्बंध में जानना चाहा तो एक ने बताया कि हम क्यों देंगे उन्हें पीने के लिए। हम तो एक एक शीशी को बचाते हैं उनसे। बंदरों के झुंड के झुंड आते हैं हम लोगों पर या जो भी यहां चैकीदार होता है उस पर हमला कर देते हैं और लूटने लगते हैं दारू। यहीं पर बैठकर पेटियां तोड़ कर पीते हैं और लूट कर भी ले जाते हैं।

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एक दूसरे गोदाम के प्रबंधक ने बताया कि साल में कई बार बंदरों के इस प्रकार के आतंक का सामना हम लोगों को करना पड़ता है। बंदरों के हमले से बचने के लिए गोदामों की सुरक्षा के चैकस प्रबंध होने के बावजूद बंदर कई बार उस समय हमला कर देते हैं जब पेटियों को ट्रकों में भरा या उतारा जा रहा होता है। प्रबंधक के अनुसार औसतन हर साल हमारे यहां से ही करीब 10-12 पेटियों का नुकसान बंदर कर देते हैं।

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लेकिन लखनऊ स्थित एक अंग्रेजी शराब की दुकान के मालिक का कहना है कि गोदाम के कई प्रबंधक बंदर के नाम पर फर्जीवाड़ा करते हैं। स्वयं पेटी गायब कर देते हैं और बंदर लूट ले गए, रजिस्टर में लिख देते हैं। हालांकि उन्होंने इससे इनकार नहीं किया कि बंदर शराब पीते हैं। उनके मुताबिक उनकी दुकान के आस पास भी कुछ बंदर कई साल से मंडरा रहे है। इन्हें शाम को कोई न कोई बची हुई पिला ही देता है नहीं मिलने पर ये लोग ग्राहकों के हाथ से शीशी छीन भी लेते हैं।

चीयर्स डेस्क

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