बढ़ती जा रही है चुनाव और शराब की घनिष्ठता

चुनाव में शराब का इस्तेमाल दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। हालांकि इस तथ्य का कोई आधिकारिक डाटा नहीं है लेकिन इस चुनाव में पकड़ी गई शराब ने पिछले तमाम चुनावों के रिकार्ड तोड़ दिए हैं। इससे स्पष्ट है कि चुनाव और शराब के रिश्ते की घनिष्ठता बढ़ रही है। अभी चुनावों का एक चरण बाकी है, और अब तक यूपी में लगभग 45 करोड़ की 16 लाख 31 हजार 53 लीटर अंग्रेजी और देशी शराब पकड़ी जा चुकी है।

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ये आंकड़े पिछले लोकसभा चुनाव 2014 से लगभग 9 करोड़ रुपए अधिक है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में 36 करोड़ 37 लाख की शराब पकड़ी गई थी। इसके अलावा 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में 27 करोड़ 24 लाख 54 हजार रुपए की शराब पकड़ी गई थी। ये आंकड़े यूपी के हैं, इन आंकड़ों के हिसाब से अगर प्रोजेक्शन तैयार किया जाए तो पूरे देश में तकरीबन 260 करोड़ रुपए की शराब पकड़ी जा चुकी है और सातवें चरण तक ये आंकड़ा 275 करोड़ रुपए तक पहुंचने की पूरी उम्मीद है।

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चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार लोकसभा के चौथे चरण तक पूरे देश में 249 करोड़ रुपए की शराब पकड़ी जा चुकी थी। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में एक करोड़ 61 लाख और 84 हजार 508 लीटर शराब पकड़ी गई थी। इस हिसाब से इस चुनाव में शराब की खपत पिछले चुनावों की अपेक्षा करीब डेढ़ गुना अधिक हो गई है।

पीने के मामले में यूपी कर रहा Trend

चुनाव आयोग के इन आंकड़ों में सबसे अधिक दिलचस्प बात ये है कि गुजरात राज्य, जो कि पिछले छह दशकों से ड्राई स्टेट बना हुआ है, वहां सबसे अधिक ड्रग्स और मादक पदार्थ इस चुनाव में पकड़े गए हैं। गुजरात में इस चुनाव के चौथे चरण तक 524 करोड़ के मादक पदार्थ पकड़े गए, इस हिसाब से गुजरात मादक पदार्थों की खपत में देश में अव्वल नंबर पर है।

बंदर भी जम कर पीते हैं शराब

सूत्रों का दावा है कि यूपी में पकड़ी गई इस शराब में देशी की मात्रा पिछले चुनाव की मात्रा की अपेक्षा कम है और बियर की मात्रा बढ़ गई है। सूत्रों का यह भी दावा है कि पकड़ी गई अंग्रेजी शराब में सबसे अधिक बैगपाइपर, एटपीएम आदि हैं जो कि पिछले साल की बचत की हैं। इन सूत्रों के अनुसार विक्रेताओं को पता था कि अप्रैल में चुनाव होंगे और यही वो दिन होते हैं जब मार्केट में शराब के ब्रांड उपलब्ध नहीं होते। इसलिए पुराने ब्रांड बचा कर रख लिए गए थे जिन्हें बाजार में उतार दिया गया।

चीयर्स डेस्क

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