अवैध शराब के कारोबारी बेखौफ, कानून नहीं कर रहा काम

अभी इसी साल फरवरी में सहारनपुर और कुशीनगर में 100 से अधिक लोगों की जान ले चुकी अवैध देशी शराब का दुख कम नहीं हुआ था कि यूपी के बाराबंकी में 17 लोगों लोगों की जान फिर जहरीली शराब ने ले ली। सरकार हर घटना पर जांच की घोषणा कर देती है, जांच होती भी है। लेकिन फिर सब कुछ सामान्य हो जाता है क्योंकि मरने वाले शराब पीते थे। उनके लिए कोई नहीं सोचने वाला कि जहरीली अवैध शराब सरकारी ठेके से लेकर पी थी। ये भी कहने वाला कोई नहीं कि यही शराब उपभोक्ता सबसे बड़ा टैक्स पेयर भी है। सबसे अधिक टैक्स शराब पीने वाले ही सरकार को देते हैं। हर साल करीब 25 से 30 हजार करोड़।

2017 की शुरुआत में आजमगढ़ मंे जब कई लोग अवैध शराब पीकर मर गए थे तो सरकार ने काफी पुराने आबकारी कानून में कई बड़े संशोधन कर कठोर सजाओं जैसे कि उम्र कैद से लेकर सजा-ए-मौत तक का प्रावधान कर दिया था। लेकिन इस कानून के लागू होने के बावजूद भी मौत के सौदागर बने जहरीली शराब के कारोबारी बेखौफ क्यों हैं, ये ज्वलंत सवाल है। वे कौन लोग हैं जो सख्त सरकार का शिकंजा ढीला किए जा रहे हैं ।

फरवरी में सहारनपुर व कुशीनगर में जहरीली शराब पीने से 100 से अधिक लोगों की जान गई थी। शासन ने 10 फरवरी को एडीजी रेलवे संजय सिंघल की अगुवाई में विशेष अनुसंधान दल (एसआइटी) का गठन किया था। एसआइटी में मंडलायुक्त गोरखपुर व सहारनपुर तथा आइजी रेंज गोरखपुर व सहारनपुर भी शामिल थे। एसआइटी को जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए 10 दिन का समय दिया गया था। हालांकि एडीजी रेलवे ने करीब 44 दिनों के बाद अपनी जांच रिपोर्ट प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार को सौंपी। इसमें दो सीओ समेत पुलिस व आबकारी विभाग के 15 से अधिक कर्मी निलंबित किए गए थे।

सहारनपुर और कुशीनगर प्रकरण में आइजी कानून व्यवस्था प्रवीण कुमार त्रिपाठी का कहना है कि सहारनपुर कांड में पुलिस ने एक माह में जांच पूरी कर नए कानून के अंतर्गत आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया था। ऐसे सभी प्रकरणों में गंभीरता से जांच कराई जा रही है। ट्रायल के दौरान पुलिस को प्रभावी पैरवी के निर्देश भी दिए गए हैं।

रुक नहीं रहीं मौतें
जनवरी 2018 में बाराबंकी में जहरीली शराब पीने से करीब 12 लोगों की मौत।
मार्च 2018 में गाजियाबाद में गईं चार लोगों की जानें।
मई 2018 में कानपुर व कानपुर देहात में जहरीला शराब से गईं कई जानें।
2017 में आजमगढ़ में 25 लोगों की जान गई।
2016 में एटा में 24 लोगों की मौत
2015 में लखनऊ के मोहनलालगंज में 50 से अधिक की मौत।

चीयर्स डेस्क

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