9/11 के बाद बढ़ी शराब की खपत

3 हजार से ज्यादा बच्चे एक झटके हुए अनाथ

9/11 की त्रासदी ने सिर्फ अमेरिका ही नहीं दुनिया भर के लोगों को झकझोर के रख दिया था। इतने सालों बाद आज भी उस घटना को याद कर दुनिया की आंखें नम हो जाती हैं।  11 सितंबर 2001 को आतंकियों ने अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, पेंटागन और पेंसिलवेनिया पर एक साथ हमले किए थे।

सुबह के वक़्त हुए इस हमले से पूरी दुनिया कांप उठी।  हमले की तस्वीरें जिसने भी देखीं वो सिहर उठा। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश पर ये सबसे भीषण और बर्बर हमला था, जिसने समूची मानवता को शर्मिंदा कर दिया।

अलकायदा के 19 आतंकियों ने चार विमानों को हाईजैक कर एक के बाद एक चार ठिकानों पर हमला कर आतंक का सबसे भीषण रूप दुनिया को दिखा दिया। पहला हाईजैक विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के उत्तरी टावर से टकराया, इसके कुछ देर बाद दक्षिणी टावर को भी आतंकियों ने एक विमान से भेद दिया।

हमले में 3 हजार से ज्यादा बच्चे एक झटके में हुए अनाथ

इन दो हमलों के बाद भी आतंक का सिलसिला नहीं थमा।  9 बजकर 47 मिनट पर वाशिंगटन के रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन पर एक विमान से हमला हुआ।  पेंटागन का एक हिस्सा गिर गया, चौथा विमान शेंकविले के खेतों में गिरा दिया।  इस पूरे हमले में करीब 3 हजार लोग मारे गए, ये मानवीय इतिहास के सबसे भीषण आतंकी हमलों में से एक था।

हमले के बाद की कहानी और भी झकझोर देने वाली है।  हमले में मारे गए और अनाथ हुए लोगों के बारे में पता किया जाने लगा तो एक सिहरन दौड़ गई। एक आंकड़े के मुताबिक 9/11 के भीषण हमले में 3 हजार 51 बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया, एक झटके में इतने बच्चे अनाथ हो गए।  इन परिवारों की त्रासदी का सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है।

नशे के आदी हो गए लोग

हमले में प्रभावित लोगों को उबरने में सालों साल लग गए।  इस दौरान कुछ आंकड़े इकट्ठा किए गए, जो ये बताने के लिए काफी हैं कि हमले के बाद भी लोग किस तनाव, हताशा और निराशा में जी रहे थे। जिन लोगों ने इस हमले में अपनों को खोया, उनकी पूरी जिंदगी बदल गई। कई लोग अपने मन को बहलाने के लिए कई दूसरी चीजों में सहारा ढूढ़ने लगे।

अमेरिका के कुछ रिसर्चर ने शोध में पाया कि 9/11 के एक हफ्ते बाद मैनहट्टन में शराब की खपत 25 फीसदी तक बढ़ गई थी।  शोधकर्ताओं ने 9/11 के एक हफ्ते बाद की तुलना उसी हफ्ते में एक साल पहले से की तो पता चला कि शराब की खपत में 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। हताश और निराश लोगों ने नशे में सुकून तलाशना शुरू कर दिया था, इस त्रासदी को भूलने के लिए लोग शराब के आदी होने लगे।

चीयर्स डेस्क 

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