43 हजार करोड़ की रिफाइनरी पर नहीं है पीने का पानी

यह कहानी है राजस्थान के सांभरा गांव की जहाँ गांव में पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है, पर वहां के बाशिंदे पीने के पानी को भी तरस रहे हैं। यहाँ  43129 करोड़ में प्रदेश की पहली रिफाइनरी बन रही है। गांव का नाम पूरे देश में चमक रहा है और ग्रामीण चमक-दमक से दूर एक मटका पानी की तलाश में भटक रहे हैं। वहीं, सड़कें खस्ता हैं तो घर कच्चे हैं। बिजली की सुविधा काफी घरों में अभी तक नहीं है। एेसे में ग्रामीण विकास की बहती गंगा के पास होते हुए भी प्यासे नजर आ रहे हैं।

गांव के हालात जस के तस

सांभरा गांव में रिफाइनरी का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन गांव में पिछले दो सालों में किसी भी प्रकार का कोई विकास नहीं दिख रहा है। पेयजल की कोई सुविधा नहीं है। ग्रामीणों को पानी खरीद कर पीना पड़ता है। पानी के लिए मवेशी भटक रहे हैं। मीठा पानी तो दूर की बात खारा पानी भी करीब डेढ़ साल पहले ही पहुंचा है, वह भी कभी कभार आता है। रिफाइनरी में निर्माण सामग्री व मिट्टी लाने वाले वाहनों के आवागमन से ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी है। गांव में अब भी उच्च प्राथमिक स्तर का विद्यालय है। उपस्वास्थ्य केन्द्र में एएनएम का पद भी रिक्त है।

चारदीवारी ने बढ़ाई दूरी

सांभरा ग्राम पंचायत पाटोदी पंचायत समिति के अधीन है। ग्राम पंचायत के कई राजस्व गांवों का पंचायत मुख्यालय से रिफाइनरी चारदीवारी के चलते सीधा संपर्क टूट गया है। अब ग्रामीणों को पंचायत मुख्यालय आने के लिए लंबा चक्कर काटना पड़ता है। सांभरा से पंचायत समिति मुख्यालय पाटोदी जाने के लिए ग्रामीणों वाया कलावा, खेड़ व बालोतरा होते हुए जाना पड़ता है।

 चीयर्स डेस्क 

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