375 रुपए लीटर देशी शराब पर 252 रुपए टैक्स….!

प्रतिष्ठित कंपनियों की डिस्टलरीज़ में बनी देशी शराब को छोड़कर लोग आखिकार कच्ची शराब पीते क्यों हैं। यही शराब कई बार जहरीली बन जाती है, उसी को पीकर अक्सर सैकड़ों लोगों की मौत हो जाती है। कुशीनगर, सहारनपुर और कानपुर में हाल में हुई मौतों के बाद ये सवाल बरबस ही सामने आ खड़ा हुआ है। इसके पीछे शराब से अधिक से अधिक धन कमाने की लालसा है, और ये लालसा किसी अन्य की नहीं, यूपी सरकार की है।

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ये बात सुनने में अटपटी जरूर लगती है लेकिन है एकदम सच। आबकारी विभाग से इस तथ्य की पुष्टि की जा सकती है। कंपनी की देशी शराब का अर्थशास्त्र पूरी तरह से सरकार के पक्ष में है। इसे यूं समझा जा सकता है कि एक लीटर देशी शराब जिसकी औसत उत्पादन लागत  375 रुपए है उसमें 252 रुपए तो सरकार ले लेती है। शेष 123 रुपए में देशी शराब की बिक्री, इसका उत्पादन, ढुलाई और अन्य लाभ आदि सभी कुछ शामिल होता है।

यूपी में शराब का अर्थशास्त्र-1

इसमें 224 रुपए तो सीधे आबकारी टैक्स के रूप में ले लिया जाता है, शेष 30 रुपए ठेकेदार लाइसेंस फीस के रूप में अदा करता है। देशी शराब की एक पेटी 2228 रुपए की गोदाम से मिलती है जिसका विक्रय मूल्य मात्र 3375 रुपए है। यानी एक पेटी देशी शराब बेचने पर मात्र 1147 रुपए ही लाभ के रूप में बचते हैं।

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दिमाग पर जरा सा भी जोर डाला जाए तो समझने में देर नहीं लगेगी कि मात्र 123 रुपए की लागत में  स्तरीय शराब कोई भी कम्पनी तैयार नहीं कर सकती। आखिर क्यों है शराब उपभोक्ताओं के साथ इतना गंभीर अन्याय।  किसी अन्य उत्पाद पर भी सरकार उसकी उत्पादन लागत का दो गुना से अधिक टैक्स वसूल करती है, और क्या कोई कंपनी अपनी उत्पादन लागत का दो गुना से अधिक टैक्स कैसे अदा कर सकता है। यूपी में देशी शराब का उत्पादन कर रहीं कंपनियां उत्पादन लागत से दो गुना से अधिक टैक्स सरकार को किस कारण दे रही हैं। क्या खेल है, इसके पीछे और क्या उस खेल का खामियाज़ा भी शराब उपभोक्ता को भुगतना पड़ रहा है क्योंकि वो इस निम्न स्तरीय देशी शराब को छोड़कर अधिक तीव्रता और अधिक सस्ती कच्ची शराब पीने को प्राथमिकता देता है।

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निश्चित रूप से यूपी में बनने वाली देशी शराब की गुणवत्ता स्तरीय नहीं है। इसका अर्थशास्त्र स्वयं कह रहा है कि इसकी गुणवत्ता से समझौता किया जाता है। यहीं पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है कि आखिर 123 रुपए प्रति लीटर की लागत से बनने वाली देशी शराब प्रति लीटर 252 रुपए टैक्स कैसे दे रही है।

शशांक तिवारी लखनऊ से 

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