ग़ालिब तो फिर ग़ालिब ठहरे

ग़ालिब तो फिर ग़ालिब ठहरे, एक बार की बात है कि मिर्जा ग़ालिब को कई दिनों तक शराब नहीं मिली। अंग्रेज हाकिमों ने उनकी सप्लाई बंद कर दी थी क्योंकि ग़ालिब शराब का बिल नहीं भरते थे। मिर्जा चूंकि पीते अंग्रेजी थे और अच्छी वाली ही पीते थे तो उन्होंने उसके लिए तमाम जतन किए। दिल्ली के अंग्रेज हुक्मरां जनरल मैटकाॅफ के वहां अर्जी भेजी और जितने भी उनके मिलने जुलने वाले अंग्रेज थे उनसे कहलवाया लेकिन उनकी शराब की रसद बहाल नहीं हुई।

मिर्जा ने जनरल मैटकाॅफ के दरबार में कहलवा भेजा कि अगर उनकी शराब की सप्लाई अभी और बंद रखी गई तो फिर समझ लीजिए कि मिर्जा ग़ालिब हमेशा के लिए शराब से तौबा कर लेगा। यह बात जनरल को बहुत भा गई लेकिन फिर भी उसने उन्हें और चिढ़ाने की गरज से कुछ दिन और इसी तरह से उनकी सप्लाई बहाल नहीं की। लेकिन मेरठ छावनी में कह दिया कि अगले दस दिनों के बाद मिर्जा ग़ालिब की सप्लाई बहाल कर दी जाए।

जनरल मैटकाॅफ ने उधर ये हुक्म जारी कर दिया और इधर का आलम ये था कि शराब न मिलने के कारण मिर्जा ग़ालिब का व्यवहार बदलने लगा। किसी से भी उलझने लगे और बात बात पर चिड़चिड़ाने लगे। इसी दौरान उनके एक हमदर्द उनके पास एक दिन एक मौलवी को लेकर पहुंचे कि मिर्जा के सिर पर जो नशे का भूत सवार है वह उतार दें और मिर्ज़ा फिर से आम लोगों की तरह जिंदगी बसर करने लगें। उस मौलवी से मिलने के बाद मिर्जा को कुछ न सूझा, लोगों का दबाव और शराब न मिलने के गम ने उन्हें पहले ही निढाल कर रखा था। इसलिए सब से आजिज़ आकर उन्होंने सभी के सामने कह दिया कि चलो ठीक है भाई अब नमाज़ पढ़ लिया करूंगा।

अगले दिन मिर्जा नमाज के लिए मस्जिद पहुंचे और अभी वजू कर ही रहे थे कि उन को एक साथी की बाहर से आवाज़ आई कि बाहर आ जाओ, शराब आ गई है। मिर्जा को यकीन नहीं हुआ तो बाहर झांक कर देखा तो उसने बोतल दिखा दी। गालिब ने बोतल देखी और बिना नमाज पढ़े ही लौटने लगे तो मौलवी ने टोका कि बिना नमाज के क्यों जा रहे हैं। मिर्जा ग़ालिब बोले , जब वजू में ही कुबूल हो गई तो नमाज का क्या करना ! और मस्जिद से बाहर आ गए।

चीयर्स डेस्क

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