होली का हुड़दंग कहीं फीका न कर दे शराब

शराब व होली का चोलीदामन का साथ है। जो कभी नहीं पीते, उनमें से भी अधिकांश होली के दिन दो चार पैग गटक ही लेते हैं। अक्सर व रोज पीने वालों की बात ही क्या है। होली के दिन पीकर गटर में गिर जाने पर भी समाज बुरा नहीं मानता है। होली के दिन शाम तक दुकान बन्द रखने के कागजी आदेश के बावजूद हर जगह धड़ल्ले से शराब बिकती है और लोग खुले दिल से पीने के साथ ही मस्ती व हंगामा करते हैं। इसके विपरीत हाल यह है कि आजमगढ़ हो या नोएडा, इटावा, मेरठ, सहारनपुर या फिर लखनऊ, अधिकांश जिलों में शराब की दुकानों से शराब गायब हो चुकी है। आज़मगढ़ में अंग्रेजी शराब के चार गोदाम एफएल-2 हैं।  इन सभी गोदामों से शराब नदारत है। यही हाल देशी शराब व बीयर का भी है। सरकारी शराब के दुकानदार चाहकर भी शराब का उठान नहीं कर पा रहे हैं। नतीजा, पवई सहित जिले की एक दर्जन शराब की दुकानें शराब न होने के कारण बंद हो चुकी हैं और दर्जनों दुकानें बन्द होने के कगार पर हैं।

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मौजूदा स्थिति यह है कि अंग्रेजी शराब की आरसी, आरएस, ब्लंडर प्राइड, इंपीरियल ब्लू, सिग्नेचर, मैगडावल जैसे लोकप्रिय ब्राण्ड जिले की 95 फीसदी दुकानों से गायब हो चुके हैं। ऐसे में लोग वह ब्राण्ड पीने को मजबूर हैं जो कभी नहीं पीते थे। यही हाल देशी शराब व बीयर का भी है। देशी शराब व बीयर के भी लोकप्रिय ब्राण्ड बाजार से गायब हैं। गोदाम मालिकों का कहना है कि डिस्टलरी से उनको शराब ही नहीं मिल पा रही है। यदि शराब मिलेगी तो वह दुकानदारों को भला क्यों नहीं देंगे।

सहानपुर और मेरठ का भी यही हाल है। अधिकतर दुकानों से लोकप्रिय ब्रांड गायब हैं, दुकानदार अपने मिलने जुलने वालों से कह रहे हैं कि जितना लेना है ले लो, होली तक बचे न बचे कुछ पता नहीं, क्योंकि सप्लाई नहीं मिल रही है।

नोएडा का मामला सबसे अलग है, पड़ोस में दिल्ली है तो यहां वैसे भी दिल्ली से अधिक कीमत के कारण शराब की बिक्री कम है। जब से गोदामों ने सप्लाई कम कर दी है दो दर्जन दुकानें लगभग खाली दिख रही हैं। होली में कुछ ही दिन रह गए हैं और लोग इस त्यौहार के लिए नोएडा की शराब दुकानों की तरफ देख भी नहीं रहे हैं।

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यूपी की राजधानी लखनऊ में हजरतगंज की दुकानों पर अभी भी स्टाॅक दिख रहा है और बिक्री भी हो रही है। लेकिन इंदिरानगर, गोमतीनगर, अलीगंज, आलमबाग, राजाजी पुरम आदि इलाकों में गिने चुने ब्रांड ही मिल पा रहे हैं। लोग होली के लिए जल्दबाजी में जो ब्रांड मिल रहा है उसे खरीद कर रखे ले रहे हैं क्योंकि एक तो मार्च की क्लोजिंग दूसरे होली, शराब उपलब्ध न होना बिल्कुल अपशकुन की तरह लग रहा है। राजधानी लखनऊ के आसपास के मोहनलाल गंज, बख्शी का तालाब, मलिहाबाद, चिनहट आदि में तो न अंग्रेजी मिल रही है और न देशी। देशी के लिए तो बाकायदा प्रदर्शन तक हो चुके हैं लेकिन शराब है कि मिल ही नहीं रही है। मौसम के साथ बियर की मांग में तेजी आई है लेकिन बियर की सप्लाई भी बाधित हुई है। मनचाही बियर भी नहीं मिल पा रही है।

किल्लत से कालाबाजारी

शराब की किल्लत के कारण कालाबाजारी लाइसेन्सी दुकानों से भी शुरू हो गई है। खासतौर पर देहाती क्षेत्र के ज्यादातर दुकानदार यह काम कर रहे हैं। शहर में कालाबाजारी कम हो पाती है। इसके साथ ही अधिक पैसा देने के बाद भी लोग पसंदीदा शराब नहीं पा रहे हैं। हर शौकीन वह ब्राण्ड पीने को मजबूर है, जो शराब वह कभी देखना भी पसंद नहीं करता था। स्थितियां यह हैं कि गर्मी का मौसम शुरू हो जाने के बाद भी लोग रम पीनेे को मजबूर हैं। जबकि लोग रम ठण्ड के मौसम में ही पिया करते थे। शराब के दुकानदारों का कहना है कि इस बार होली में रम की ही धूम रहेगी और यही हालात रहे तो होली के पहलेे ही तमाम दुकानों से रम भी गायब हो जाएगी।

आजमगढ़ से संदीप अस्थाना,

नोएडा और सहारनपुर से नीरज महेरे,

लखनऊ से शशांक तिवारी

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