हाईवे के ढाबों में खपाई जा रही कच्ची और सरकारी शराब

छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर से बाहर निकलते ही हाईवे के किनारे ढाबा और होटल नजर आते हैं, उनमें अधिकतर ऐसे हैं जो अवैध मयखाना बने हुए हैं। बिचौलियों के लिए ये ढाबे कच्ची और सरकारी शराब खपाने के अड्डे बन गए हैं, जहां रोजाना देर शाम के बाद जाम छलकने लगता है। यह मयखाना देर रात तक सजा रहता है। इनमें शहर के निकटवर्ती इलाकों के साथ दूरदराज के ढाबे भी शामिल हैं। आबकारी विभाग जानकर भी अंजान हैं। अवैध रूप से बिक रही शराब से शराब माफियाओं को तो फायदा हो रहा है, लेकिन युवा पीढ़ी को नशे का आदी बनाया जा रहा है। इससे सड़क दुर्घटनाओं में भी इजाफा हो रहा है।

शहर के अवैध शराब के ठिकानों से लेकर जिले के 12 से 15 स्थान और एक दर्जन से ज्यादा ढाबों में अवैध रूप से शराब की बिक्री की जा रही है। इनमें कोरबा-चांपा और कोरबा से बिलासपुर-अंबिकापुर मार्ग शामिल हैं। यहां रोजाना एक से डेढ़ लाख रुपये की अवैध शराब बेची जाती है। अगर यह आंकड़ा महीने के रूप में देखा जाए तो हर महीने 30 से 35 लाख रुपये का अवैध शराब का कारोबार होता है। इन ठिकानों पर संचालित इस अवैध धंधे को खत्म करने के लिए साल भर पहले तत्कालीन आबकारी अधिकारी ने गंभीरता लेते हुए कार्रवाई की थी। कुछ दिनों तक जहां अवैध शराब की बिक्री बंद हो गई थी, वहीं फिर से अवैध रूप से मयखाना संचलित होने लगा है। हालांकि शहर में आबकारी विभाग के पदाधिकारी लगातार कार्रवाई की बात कहते हैं, लेकिन ढाबों के अवैध शराब के मयखाने अनवरत जारी हैं। वास्तविकता हाईवे के किनारे रोजाना शाम के बाद देखी जा सकती है।

अफसरों को राजस्व की चिंता

आबकारी अफसरों को कार्रवाई से अधिक राजस्व टारगेट की चिंता रहती है। वजह यह है कि सरकारी आय का मुख्य जरिया होने से विभाग को प्रतिमाह राजस्व के लिए जवाबदेय होना होता है। शराब की जितनी बिक्री होगी उतना राजस्व में इजाफा होगा। शहर की कॉलोनियों और अवैध शराब बिकने के ठिकानों की बात करें तो सबसे अधिक उन्हीं जगहों पर नियम को ताक में रख शराब बेचा जा रहा है, जहां शराब की दुकानें संचालित है। जिले में छह बार को शराब बेचने की अनुमति है। बार में सुबह से रात बारह बजे तक खुलेआम जाम छलकाया जा रहा है। आलम यह है कि शहर के हृदय स्थल में संचालित बार में तो रोजाना तकरार होते हैं।

चीयर्स डेस्क 

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