हर घर को नल से जल

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पांच जुलाई को पेश आम बजट 2019-20 के बजट भाषण में नल से जल मुहैया कराने और केंद्र सरकार की विभिन्न मौजूदा योजनाओं को मिलाकर जल जीवन मिशन शुरु करने का ऐलान किया था।इसके बाद सरकार ने तत्कालीन पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता विभाग और जल संसाधन मंत्रालय को मिलाकर जलशक्ति मंत्रालय का गठन किया। साथ ही एक जुलाई से जलशक्ति मिशन की शुरुआत की। यह मिशन जल की कमी का सामना कर रहे 256 जिलों में चलाया जा रहा है।

इस महत्वाकांक्षी मिशन पर अगले पांच साल में भारी भरकम 3,60,000 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। खास बात यह है कि इस मिशन के तहत प्रत्येक व्यक्ति को रोजाना 55 लीटर पानी मुहैया कराने के इरादे से पाइप से जल आपूर्ति का कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा।

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जलशक्ति मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के सचिव की अध्यक्षता वाली एक समिति बुधवार को ‘जल जीवन मिशन’ के मसौदे को अंतिम रूप दे सकती है। इसके बाद मंत्रालय इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजेगा। यह केंद्र प्रायोजित योजना होगी।

सूत्रों ने कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के दौरान ‘जल जीवन मिशन’ पर भारी भरकम 3,60,000 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। यह राशि जल वितरण पर खर्च की जाएगी। इसके अलावा जल स्रोतों के रख-रखाव पर खर्च इससे अलग होगा। चालू वित्त वर्ष शेष आठ महीनों में ही इस मिशन पर 30 हजार करोड़ रुपये से खर्च होने का अनुमान है।

सूत्रों के मुताबिक ‘जल जीवन मिशन’ के तहत अगले पांच वर्षो में 14 करोड़ से अधिक परिवारों को पानी का कनेक्शन मुहैया कराया जाएगा। इसके तहत उन्हें प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कम से कम 55 लीटर जल की आपूर्ति की जाएगी।

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सूत्रों के अनुसार दिसंबर 2018 तक लगभग 47 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को किसी न किसी स्रोत से प्रतिदिन 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के हिसाब से जल आपूर्ति की सुविधा। हालांकि पाइप से जल आपूर्ति का कनेक्शन महज 20 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास है।

इससे पूर्व भारतीय जनता पार्टी ने 2019 के लोक सभा के अपने घोषणापत्र में ‘जल जीवन मिशन’ शुरु कर हर घर को 2024 तक नल से जल उपलब्ध कराने का वादा किया था। पार्टी ने नया जलशक्ति मंत्रालय बनाने का वादा भी किया था।

चीयर्स डेस्क 

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