हमारा पानी तो ‘विकास’ पी गया, हम क्या पिएं

सण्‍डीला औद्योगिक क्षेत्र में कई कंपनियां लगी हुई हैं जिनके रॉ मटेरियल में पानी शामिल है। इनमें शराब, कोल्ड ड्रिंक और दूध बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं। इस क्षेत्र से लगे गांव वालों का आरोप है कि यह कंपनियां भूजल का बहुत अध‍िक दोहन कर रही हैं, जिस वजह से इलाके का भूजल स्‍तर गिरता जा रहा है और इन लोगों को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में करीब 10 से 15 गांव पानी की समस्‍या से जूझ रहे हैं। हरदाई का सराय मारुफपुर गांव भी इस असर से अछूता नहीं है। 

यूपी में अनियोजित और अनियंत्रित दोहन की वजह से प्रदेश के शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में भूजल खतरनाक स्‍तर पर घटा है। प्रदेश में मुख्‍य तौर से सिंचाई, पीने के पानी और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भूजल का दोहन किया जाता है। भूजल पर बढ़ती निर्भरता का आकलन इस बात से लगाया जा सकता है कि यूपी में वर्ष 2000 में जल विकास/दोहन दर 54.31% थी और 2009 में यह 72.16% अनुमानित थी जो 2011 में बढ़कर 73.65 हो गई और 2013 में 73.78% हो गई।

कंपनियों के ग्राउंड वॉटर पर निर्भरता की बात करें तो 85 प्रतिशत औद्योगिक क्षेत्र की जरूरतें भूजल से ही पूरी होती हैं। आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि जिस कोल्‍ड ड्रिंक कंपनी की बात ग्रामीण कर रहे हैं उसे सालाना 10.36 लाख घनमीटर भूजल का उपयोग करने की इजाजत मिली हुई है। वहीं ग्राउंड वॉटर रिचार्ज के नाम पर उसे सिर्फ 6.31 लाख घनमीटर पानी रिचार्ज करना है।

ऐसा नहीं है कि पानी के गिरते स्‍तर की सिर्फ कोरी शिकायतें की गई हैं। गांव वालों ने इन कंपनियों के खिलाफ कई बार प्रदर्शन भी किया है। कई बार ग्रामीणों ने लिख‍ित में शिकायत भी दर्ज कराई है। इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए अध‍िकारियों ने जांच भी की, लेकिन जस का तस बना रहा और भूजल का स्‍तर गिरता गया।

बात जांच और कार्यवाही के आश्वासन पर आ कर टिक जाती हैं।  कुछ दिन के हो हल्ला  के बाद पूरा मामला ठंडा पड़ जाता है। ऐसे में लोग उम्मीद हार रहें हैं।  पिछले 2 से 3 साल में जल स्तर का 40-50 फुट से 200 से 250 फुट नीचे चले जाना कोई आम बात नहीं है अगर कंपनी द्वारा ऐसा ही दोहन होता रहा तो एक दिन ऐसा आएगा को लोगो को आर्सेनिक युक्त पानी पीना पड़ेगा जिसके परिणाम और भी भयावह होंगे।

चीयर्स डेस्क 

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