स्टेशनों पर बैन होगी पॉलीथीन

रेलवे में प्लास्टिक बैन का खामियाज़ा कौन भुगतेगा, यात्री जो अभी पूरी तरह से पीने के पानी के लिए प्लास्टिक की बोतलों और शीशियों पर निर्भर हैं। स्वयं रेलवे जो पानी ’रेल नीर’ आपूर्ति करता है वह भी प्लास्टिक की बोतलों में ही आता है। प्लास्टिक पर बैन को लेकर रेलवे में भी उच्च स्तर तक भ्रम बना हुआ है। हालांकि रेलवे ने पीने के पानी को तैयार करने के कुछ प्लांट लगाने की कार्ययोजना स्वयं तैयार की है लेकिन यह नहीं तय हो पा रहा है कि अब यात्रियों को पानी की सप्लाई किस तरह संभव हो पाएगी।

प्रधानमंत्री के लालकिले से की गई अपील पर अमल करते हुए संसद भवन में  प्‍लास्टिक की बोलतों का इस्‍तेमाल न करने का फैसले के बाद अब रेल मंत्रालय ने भी इस पर रोक लगा दी है।  रेल मंत्रालय ने एक बार इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक पर पाबंदी लगा दी है।  रेल मंत्रालय की ओर से जारी यह आदेश 2 अक्टूबर से लागू होगा।

प्रधानमंत्री की अपील के बाद सरकार के सभी मंत्रालय भी इस दिशा में तैयारी कर रहे है।  सभी मंत्रालय 2 अक्टूबर से एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक पर रोक की तैयारी है।  ये मंत्रालय पीएम मोदी की अपील को अमल में लाने, इसके पहले लोकसभा अध्यक्ष ने हानिकारक प्लास्टिक बोतलों को रोकने की पहल की है।

आईआरसीटीसी लगाएगा बोतलबंद पानी के नौ  प्लांट

आईआरसीटीसी को निर्देश दिया गया है कि वह पानी बोतल की ऐसी व्यवस्था करे, जिसमें बोतल लौटने की व्यवस्था हो। मंत्रालय ने रेल कर्मियों को हिदायत दी है कि वे 50 माइक्रॉन से कम वाले प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करें। ऐसे प्लास्टिक का इस्तेमाल करें, जिसे रिसाइकिल किया जा सके। स्टेशनों पर लगे रिसाइकिलिंग मशीन में प्लास्टिक के बोतलों को तुरंत रिसाइकिल करने का आदेश दिया गया है। रेलवे ने अपने सभी छोटे-बड़े स्टेशनों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्लास्टिक मुक्त भारत बनाना है। इसमें अपना सौ फीसदी योगदान दें। ए वन व ए ग्रेड के स्टेशनों पर प्लास्टिक बंद की निगरानी के लिए कमेटी बनाने का आदेश दिया गया है। रेलवे मुजफ्फरपुर जंक्शन पर भी खास नजर रखेगा।

बता दें कि इससे पहले लोकसभा सचिवालय की तरफ से आदेश जारी कर प्‍लास्टिक की बोतलों सहित अन्‍य सामान के इस्‍तेमाल पर रोक लगा दिया गया।

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