सोनभद्र में वर्षा जल संचयन की अनोखी पहल

अभी ज्यादा वक्त नहीं हुआ जब देश का एक बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में आ गया था और बारिश आते ही देश के कई हिस्से भीषण बाढ़ त्रासदी झेल रहे हैं। वर्षा जल प्रबंधन और वर्षा जल संचयन यदि सही तरीके से हो, तो देश के जिन प्रदेशों, जिलों में पेयजल का गंभीर संकट है उन्हें उस से छुटकारा मिल सकता है।

तेजी से नीचे जा रहे वाटर लेवल के कारण सोनभद्र में पानी की समस्या गंभीर होती जा रही हैं। इस समस्या को देखते हुए सोनभद्र जनपद में सरकार द्वारा जल संरक्षण के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। सोनभद्र के मुख्य विकास अधिकारी अजय द्विवेदी बताते हैं, “गर्मी के मौसम में पूरे सोनभद्र जिले में पानी की भारी किल्लत हो जाती है।

दूर-दराज गांवो तक टैंकर के जरिये पानी पहुचाया जाता है उसके बावजूद बहुत से लोगों को जहां पानी उपलब्ध नही होता उन्हें “चुहाड़” (नदी के किनारे छोटा सा गड्ढा खोदकर जिससे पानी रिसता है) का पानी मजबूरी में पीना पड़ता है।” वो आगे बताते हैं कि सोनभद्र में बारिश अच्छी होती है लेकिन पठारी क्षेत्र होने के कारण यहां वर्षा का पानी रुकता नहीं बह जाता है, जिसके चलते यहां वर्षा जल का संचय नहीं हो पाता और सोनभद्र में पानी का स्तर धीरे-धीरे घटता जा रहा है। यहां पर वर्षा के जल का संचय करने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है, जिस क्रम में लगभग दो हजार तालाबों का निर्माण कराया गया है और पांच हजार तालाब निर्माण का लक्ष्य रखा गया है ताकि जल संचय निर्बाध रूप से हो सके।

सोनभद्र में किया जाएगा पांच हजार ‘टंका’ का निर्माण

मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि सोनभद्र में वर्षा जल संचयन से पानी की किल्लत को दूर करने के उद्देश्य के तहत जिले में पांच हजार टंका निर्माण का लक्ष्य रखा गया है और प्राथमिकता के आधार के जनपद में 200 गांवों का चयन किया गया है। जिनमें प्रथम चरण में 2500 “टंका ” निर्माण का काम शुरू कर दिया गया है।

इस टंका के निर्माण से जहाँ एक तरफ वर्षा जल संचयन होगा वही ग्रामीणों के लिए साल भर के पानी का इंतजाम हो जाएगा। अजय द्विवेदी आगे बताते हैं, “टंका निर्माण के लिए प्राथमिकता पर वो गाँव चिन्हित किये गये है जहाँ गर्मियों के मौसम में सबसे ज्यादा वाटर सप्लाई करनी पड़ती है इन गांवो में गर्मी बढ़ते ही पानी की गंभीर दिक्कत हो जाती है।

इन टंका की जल संचयन क्षमता 25 हजार लीटर की है और टंका का कैचमेंट एरिया को पक्का करने के साथ ही उसे कवर्ड किया गया गया है ताकि ग्रामीण इस जल का उपयोग पेयजल के रूप में कर सके। गांवो में कम्युनिटी टंका के निर्माण के लिए भी प्रयास किया जा रहा है ताकि पानी की दिक्कत को कम किया जा सके।”

चीयर्स डेस्क 

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