सॉफ्ट ड्रिंक्स से सेहत बिगड़ी पानी ने सुधारी

अमेरिका की सिलिकॉन वैली में ऊंची तनख्वाह पाने वाली महत्वाकांक्षी कारा गोल्डिन का वजन लगातार बढ़ रहा था। सुस्ती, थकान ज्यादा और जल्दी होने लगी थी। तब एक डॉक्टर दोस्त ने कारा से कहा कि अगर वह अपनी पीने की डाइट सही कर ले, तो स्वास्थ्य से संबंधित ज्यादातर चीजें अपने आप सही हो सकती हैं। तब कारा ने सॉफ्ट डिंक छोड़ पानी पीना शुरू किया, लेकिन लगातार सादा पानी पीकर बोर हो गईं। इसके बाद वह पानी में कुछ फल के टुकड़े काट के रखने लगी। इससे पानी ज्यादा स्वादिष्ट हो गया। इस अनुभव से कारा को बिजनेस आईडिया आया।

साल 2005 में कारा ने नेचुरल फ्रूट के साथ फ्लेवर्ड पानी की बॉटल का काम शुरू किया। बिना कोई प्रिजरवेटिव, शुगर या स्वीटनर इस्तेमाल किए कारा ने फ्लेवर्ड पानी की सप्लाई शुरू की। आज उनकी कंपनी हिन्ट की सालाना बिक्री 10 करोड़ डॉलर (700 करोड़ रुपए) से ज्यादा है। हिन्ट 26 फ्लेवर में ड्रिंक बना रही है। गूगल, फेसबुक सहित सिलिकॉन वैली की सैकड़ों कंपनियां अपने ऑफिस में इन ड्रिंक्स का इस्तेमाल करती हैं।

30 दिनों में 9 किलो वजन कम हुआ 
परेशानी के दिनों में कारा ने देखा था, वह हर दिन डाइट कोला की लगभग 10 केन पी रही थीं। यानि हर दिन 3 से 4 लीटर कैफीनयुक्त, कृत्रिम रूप से मीठा किया हुआ लिक्विड। इसी वजह से उन्हें सुस्ती और थकान ज्यादा हो रही थी। वजन और मुंहासे बढ़ रहे थे। इसके बाद कारा ने एओएल टेक ग्रुप की अपनी शीर्ष स्तर की नौकरी छोड़ दी। पूरी लाइफस्टाइल को बदला। तब एक महीने के अंदर उसका वजन 9 किलो कम हो गया, मुंहासे साफ हो गए। वह खुद को फिर से ऊर्जावान महसूस करने लगीं।

सॉफ्ट ड्रिंक्स हमेशा विवादों में रहा
कई विशेषज्ञों और हेल्थ रिपोर्ट का दावा है कि ये ड्रिंक्स हेल्थ के लिए नुकसानदायक हैं। यह दांत से लेकर हमारी हड्डियों तक को नुकसान पहुंचाते हैं। सितंबर 2019 में आई वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार अर्ली डेथ के लिए भी ये ड्रिंक्स जिम्मेदार हैं। इसमें मौजूद फॉस्फोरिक एसिड हड्डियों को कमजोर बनाता है। इसमें मौजूद आर्टिफिशियल शुगर और प्रिजर्वेटिव भी हानिकारक है। हालांकि कंपनियां इससे इनकार करती रही हैं।

चीयर्स डेस्क 

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