सिर्फ 1 रुपये में 100 लीटर पानी होगा आर्सेनिक मुक्त

बिहार के ग्रामीण इलाकों में जल्द ही आरओ से भी शुद्ध, पोषक तत्वों से भरपूर सस्ता पानी पीने को मिलेगा। यह पानी आर्सेनिक और लोहा से पूरी तरह मुक्त होगा। आर्सेनिक प्रभावित इलाके में यह पानी एक रुपये में 100 लीटर मिलेगा।

यह संभव होगा असम के तेजपुर विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र के प्रो. रॉबिन कुमार दत्ता के आर्सिरॉन निलोगॉन तकनीक से। प्रो. रॉबिन की इस तकनीक का परीक्षण राज्य के बक्सर जिले के सर्वाधिक आर्सेनिक प्रभावित ब्लॉक सिमरी और ब्रह्मपुर में हो चुका है। परीक्षण के दौरान एनआईटी पटना के विशेषज्ञ मौजूद थे। बक्सर के डीएम राघवेंद्र सिंह की पहल पर पोषण अभियान के तहत प्रो. दत्ता की तकनीक का प्रदर्शन किया गया।

इसमें मौजूद लोगों को पानी से आर्सेनिक और आयरन निकालने के लिए आर्सिरॉन निलोगन तकनीक की जानकारी दी गई। घरों में इस्तेमाल होनेवाले खाने का सोडा, पौटैशियम परमैग्नेट और फेरिक क्लोराइड जैसे सस्ते रसायन का प्रयोग कर पानी को आर्सेनिक मुक्त किया जा सकता है। राष्ट्रीय पोषण मिशन के मयंक जोशी ने बताया कि बक्सर के अलावा आर्सेनिक प्रभावित अन्य जिलों के गांवों में भी इस विधि का प्रयोग होगा।

क्या है आर्सिरॉन निलोगॉन 
आर्सिरॉन निलोगन पानी से आर्सेनिक व आयरन (लोहा) निकालने का सबसे सस्ता और प्रभावी तकनीक है। इसे प्रो. रॉबिन कुमार दत्ता ने विकसित किया है। इसके लिए उन्हें भारत सरकार से पेटेंट मिल चुका है। यह 1000 पीपीबी जैसे उच्च आर्सेनिक वाले पानी को शुद्ध करके आर्सेनिक की मात्रा 2 पीपीबी से भी कम कर देता है। सस्ती होने के कारण इस तकनीक से ग्रामीण इलाके के गरीब से गरीब व्यक्ति को भी शुद्ध पानी पीने को मिल सकेगा। श्रीश्री रविशंकर समेत कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं उनकी सराहना कर चुकी हैं।

प्रभावित गांवों में लगेगी यूनिट: डीएम 
बक्सर डीएम राघवेंद्र सिंह ने बताया कि शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय से 26 लाख जिले को दिया था। आर्सेनिक मुक्त पानी पर इनोवेटिव आइडिया के लिए जिले को यह पुरस्कार की राशि मिली थी। इस राशि से टाटा शुद्ध जैसे उपकरण खरीद कर कुछ प्रभावित गांवों में बांटे जा सकते थे, लेकिन कुछ नया करने के उद्देश्य से प्रो. रॉबिन दत्ता से संपर्क किया गया। इनकी तकनीक काफी सस्ती और आर्सेनिक को निकालने में प्रभावी है। तीन अक्टूबर को सिमरी और ब्रह्मपुर ब्लॉक में तकनीक का प्रदर्शन किया गया। एनआईटी के प्रोफेसर प्रो. सुब्रतो दास की मदद से जीविकाकर्मियों ने पानी साफ करने की 10-10 यूनिट तैयार की है। इसे आर्सेनिक प्रभावी गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों पर और सामुदायिक भवनों में लगाया जाएगा। इसके रखरखाव के लिए हर आंगनबाड़ी केंद्रों पर मास्टर ट्रेनर भी रखे जाएंगे।

चीयर्स डेस्क 

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