सरकारी उदासीनता में फंसी पेयजल योजना

राजस्थान के झालावाड़ जिले के लोगों को घर-घर पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई पेयजल स्कीमों को हरी झंडी मिली। इनमें से चछलाव और झालावाड़ की स्कीमें तय समय निकल जाने के बाद भी अधूरी हैं। रायपुर और सारोला दोनों कस्बों में करीब 8 करोड़ रुपए से काम पूरे हो चुके हैं, फिर भी इन कस्बाें की अाधी अाबादी तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।

सारोला में तो पीएचईडी के अधिकारियों ने जिन निजी कॉलोनियों में एक मकान तक नहीं बना है, वहां पर पाइप लाइन बिछा दी है, जबकि आबादी क्षेत्र के कई हिस्से छोड़ दिए हैं। इसके चलते लोगों को वर्तमान में भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। जब पड़ताल की गई कि आखिर क्यों यह स्कीमें धरातल पर नहीं पहुंच पा रही हैं। इन स्कीमों को पिछली गर्मियों से पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी तक इन स्कीमों का काम अधूरा ही है। ऐसे में परेशानी सिर्फ लोगों को उठानी पड़ रही है।

अमृत योजना : 75 करोड़ से शुरू, दो बार अवधि बढ़ाई, अब भी पूरी नहीं हो पाई: 

शहर को 100 लाख लीटर पानी अतिरिक्त देने वाली सबसे बड़ी पेयजल परियोजना अमृत के हाल खराब हैं। अमृत योजना का काम 75 करोड़ रुपए से शुरू हुआ। अप्रैल 2019 से पहले ही इसके काम को पूरा किया जाना था, लेकिन इसके विपरीत हालात यह हैं कि काम अब तक अधूरा है। शहर में 13 हजार पेयजल कनेक्शन होने हैं, लेकिन 10 फीसदी कनेक्शन भी नहीं हो पाए। टंकियां बन चुकी हैं, लेकिन छापी पर पंप हाउस का निर्माण अधूरा होने से छापी का पानी शहर में नहीं आ पा रहा है। इसका काम 60 फीसदी भी नहीं हो पाया है। ऐसी स्थिति में आने वाली गर्मियों में भी पानी मिलने की उम्मीद लोगों को दिखाई नहीं दे रही है। यहां मंगलपुरा पुराना पोस्ट ऑफिस क्षेत्र, कालीदास कॉलोनी, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का कुछ हिस्सा, वंदावन गांव, अशोक विहार कॉलोनी सहित अन्य कॉलोनियों में सालभर ही पेयजल संकट रहता है।

रायपुर में भी वहीं हालात : 3 किमी का आबादी क्षेत्र रह गया लाइन डलने से वंचित

रायपुर में 498.50 लाख रुपए की लागत से पुनर्गठित पेयजल योजना का काम पूरा हो चुका है, लेकिन यहां अब तक 3 किमी के आबादी क्षेत्र में लोगों को पेयजल संकट से गुजरना पड़ रहा है। यहां आबादी क्षेत्र मुख्य बाजार, सेंट्रल बैंक के पीछे, सुनेल रोड सहित अन्य क्षेत्रों में नई पेयजल लाइन नहीं डल पाई। इससे इन क्षेत्रों में लोग पीने के पानी के लिए भी भटक रहे हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों खर्च होने के बाद भी पानी नहीं मिल पा रहा है। कस्बे के कुछ एरिया को पुरानी लाइन से ही जोड़ दिया गया है, जो गलत है।

 चीयर्स डेस्क 

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