सरकारी बेरुखी से नदी बन गई नाला

यूपी के मुजफ्फरनगर जिले के कस्बा खतौली से छह किलोमीटर दूर गांव अंतवाड़ा है। यहां अब तक गन्ना और गेहूं बोया जाता था। आठ फीट की खोदाई में ही यहां एक जलधारा फूटी है। रमन त्यागी बताते हैं, जनश्रुतियों और सरकारी दस्तावेजों में भी काली नदी का यही उद्गम स्थल है। ग्रामीणों ने 1992 तक यहां पानी देखा है। करीब 93 वर्षीय बुजुर्ग सुनहरा कहते हैं, बचपन में तो मैं नागिन को रोजाना पार कर चारा लेने जाता था।

मुजफ्फरनगर में नाली बलखाती चलती थी, लिहाजा इसे यहां नागिन कहा जाता है। अब एक बार फिर अंतवाड़ा में नदी बह रही है। लेकिन ये क्या, मेरठ में प्रवेश से पहले ही यह सूखी दिखने लगती है। ऐसा लगा मानों 22 किलोमीटर की दूरी में ही सब खत्म हो गया।

कुछ दूर बढ़े तो नंगली तीर्थ के निकट पुल पर एक ओर नदी पर सूखे कचरे का अंबार तो दूसरी ओर गांव से निकला पानी तलहटी में जमा है। लावड़ में नालों के दूषित पानी ने नदी का रूप ही बिगाड़ दिया है। मेरठ में गांव जलालपुर में आबू नाला 71 और आबू नाला 73 शहर भर का सीवरेज ढोते हुए काली में गिरते हैं। यहां नदी की छटपटाहट समझी जा सकती है। लगता है मानों यहां पानी नहीं तेजाब हो। चारों ओर हरे खेत थोड़ा सुकून तो देते हैं, लेकिन 500 मीटर दूर दिखता है कि पंपसेट के जरिये इसी पानी से सैंकड़ों एकड़ के आलू, गोभी, मेथी, मूली के खेत सींचे जा रहे हैं। मन खिन्न हो जाता है।

गंगा-जुमना के दोआब के शहरों (मेरठ-बुलंदशहर-अलीगढ़) के बीचोंबीच बहने वाली काली नदी आज नाला बनकर रह गई है। काली किनारे के गांव वाले असाध्य रोगों से ग्रस्त हैं। काला दूषित पानी और बदबू ..आज काली की पहचान है।

यहां हैंडपंप से पानी नहीं पीता गांव का गांव

मेरठ के ही गांव आढ़ में तैयब अली की मां जैबुन निशा की कैंसर से मौत हो गई। काली की ओर अंगुली उठाते हुए बोले, इसी की वजह से मर गई अम्मी। गांव में ही निसार उर्फ चुन्ना हैं, जिन्हें गले का कैंसर है। वहां पहुंचे तो घर वालों ने बताया कि डॉक्टर ने हैंडपंप का पानी बंद करा दिया है। यानी यहां भी रोग की जड़ में पानी और इस पानी का स्नोत काली। कुढ़ला में भी यही दिक्कत मिठाई की दुकान चलाने वाले तेज सिंह और गांव के ही युवा इंसाफ ने बतायी थी। कुढ़ला में भी सभी सरकारी हैंडपंप बंद करा दिए गए हैं। प्राइवेट हैंडपंप लोगों ने उखाड़ दिए हैं। पानी टंकी या फिर सबमर्सिबल से ही ये पीने, खाना बनाने का पानी लाते हैं।

चीयर्स डेस्क 

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