सामाजिक हितों का बोझ भी शराबियों के कंधों पर4

यूपी सरकार की नई आबकारी नीति से शराबियों के साथ साथ शराब के कारोबारी भी परेशान हैं। हाल यह है कि जहां रिन्युवल फीस काफी अधिक हो जाने के कारण तमाम छोटे कारोबारियों ने अपनी दुकान छोड़ दी और वह सड़क पर आ गए हैं, वहीं शराब का दाम बढ़ने के कारण पीने वाले भी परेशान हैं। पीने वालों का कहना है कि नौनिहालों की शिक्षा का मामला हो या फिर देश व समाज के हित का अन्य कोई मामला, सारे दायित्वों का बोझ हम शराबियों पर ही लाद दिया जाता है। अब जबकि सूबे की सरकार ने गोवंश की रक्षा का प्रण ले लिया है तो उसके संरक्षण का बोझ भी हम शराबियों पर ही लादने की तैयारी कर ली गई है। इन शराबियों का कहना है कि उनको गोवंश के संरक्षण का यह बोझ भी उठाने में कोई खास दिक्कत नहीं है, मगर वह यह जरूर चाहते हैं कि जब वह देश व समाज के साथ सीना तानकर खड़े रहते हैं और हर जिम्मेदारियों का मुस्कराते हुए निर्वहन करते हैं तो उनके हितों का भी संरक्षण किया जाना चाहिए।

शराबियों को होगी परेशानी, कारोबारियों का होगा लाभ

यूपी सरकार की नई आबकारी नीति ने प्रदेश के शराबियों के सामने आर्थिक समस्या खड़ी कर दी है। ये नीति पहली अप्रैल से लागू हो जाएगी। इस नीति से शराबियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा लेकिन शराब कारोबारी लाभान्वित होंगे। वजह ये है कि पहली अप्रैल 2019 से अंग्रेजी शराब के एक क्वार्टर पर एक रुपए , हाफ पर दो रुपए और बोतल पर तीन रुपए अतिरिक्त देने पड़ेंगे। ये रुपए गौशाला बनाने के लिए इकट्ठा किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार के इस नए फरमान से शराब कारोबारियों का लाभ होगा। इसकी वजह यह है कि सरकार भले ही शराब के दाम में एक, दो व तीन रुपए की बढ़ोत्तरी कर रही है मगर शराब कारोबारी सभी से सीधे पांच रूपए अधिक वसूल करेंगे। निरीह प्राणी की तरह से जीने वाले शराब पीने वाले हमेशा की तरह इसका विरोध भी नहीं कर पाएंगे।

पीने वालों का छलका दर्द

सरकार के इस नए फरमान के बाबत आजमगढ़ शहर के सिविल लाइन स्थित सरकारी शराब की दुकान पर शराब खरीद रहे कई शराबियों से चीयर्स डाट काॅम की टीम ने बातचीत की। आजमगढ़ शहर के ही रहने वाले दुर्गेश सिंह ने कहा कि दुर्भाग्य है कि पूरी दुनियां में हम शराबियों की संख्या किसी भी वर्ग व समुदाय से कई गुना ज्यादा है। इसके विपरीत हमारा कोई संगठन नहीं है, जिसके कारण हमारे हित की लड़ाई लड़ने वाला कोई नहीं है। इसी का नतीजा है कि सरकार ने गोवंश के संरक्षण का बोझ भी हम पर लादने की तैयारी कर ली है। देश व समाज का सारा बोझ इस तरह से हम लोगों पर लादा जाता है जैसे हम दुनियां के सबसे रईश लोग हैं। वैसे हमें यह नया बोझ उठाने में भी कोई आपत्ति नहीं है मगर सरकार को यह भी करना चाहिए कि देश व समाज के हित में हमेशा काम करने वाले शराबियों को भी कुछ सहूलियतें व हमारे हितों का भी संरक्षण किया जाना चाहिए।

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आजमगढ़ शहर के नरौली निवासी रामानन्द सोनकर ने कहा कि हमारे हितों के संरक्षण के लिए एक आयोग गठित किया जाना चाहिए और शराबियों का निःशुल्क बीमा किया जाना चाहिए। आजमगढ़ शहर के कटरा मुहल्ला निवासी रामसिंह ने कहा कि बीमार होने की दशा में निःशुल्क इलाज की सुविधा व पीने से मौत होने पर उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। जहानागंज इलाके के धरवारा गांव निवासी देवेन्द्र मिश्र ने कहा कि नियमित पीने वालों को विशेष कार्ड जारी किया जाना चाहिए और उन्हें यह सहूलियत होनी चाहिए कि यदि कोई दुकानदार स्वेच्छा से उनको अपने यहां बैठाकर पिलाता है तो पीने व पिलाने वालों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। रानी की सराय इलाके के रामपुर टड़वा निवासी बृजेश यादव ने कहा कि यदि कोई शराबी अधिक शराब पीकर गिर जाता है तो पुलिस उसे ससम्मान घर तक सुरक्षित पहुंचाये, इस तरह का सरकारी फरमान होना चाहिए।

क्या कहते हैं शराब के कारोबारी

आजमगढ़ के बड़े शराब कारोबारी राजा संतोष साहू का कहना है कि सरकार ने शराब दुकान की रिन्युवल फीस इस साल चालीस फीसदी तक अधिक कर दी है। इसका नतीजा ये रहा कि आजमगढ़ जिले में करीब 72 दुकानों के अनुज्ञापी अपनी दुकान का रिन्युवल नहीं कराए। इसमें ज्यादातर ऐसे अनुज्ञापी रहे जिनके पास एक ही दुकान थी। ये सभी सड़क पर आ गए हैं। इसके साथ ही फीस अधिक होने के कारण एक बड़े कारोबारी ने शहर के रैदोपुर में स्थित अपने माॅडल शाप का रिन्युवल नहीं कराया। एक शराब कम्पनी के मैनेजर विपुल सिंह ने कहा कि ऐसे ही चलता रहा तो अगले साल कोई अपनी दुकान का रिन्युवल नहीं कराएगा ।

संदीप अस्थाना, आज़मगढ़ से

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