सप्लाई वाटर से लगता है डर

देश में आजकल कई मुद्दे छाए हुए हैं, और उनमें स्वास्थ्य का मुद्दा तो लगता है कहीं ग़ायब सा हो गया है। प्रदूषण जैसे गंभीर विषय अब केवल एलिट क्लास के डिस्कशन का हिस्सा भर बनकर रह गया है। लेकिन यह विषय आम लोगों को भी प्रभावित कर रहा है।

यूपी के नोएडा में 12 सोसाइटी और 10 से ज़्यादा सेक्टर्स में पानी की गुणवत्ता को लेकर एक सर्वे किया गया। इन इलाकों में नल से निकलने वाला पानी, पीना तो छोड़िए धोने के काम का भी नहीं है। सोसाइटी निवासी बताते हैं कि अगर ग़लती से कहीं नल खोल दिया तो पूरे घर में नाली के पानी जैसी दुर्गंध फैल जाती है।

नोएडा ऑथिरिटी द्वारा सप्लाई पानी में टीडीएस (पानी में घुले खनिज या कुल घुलित ठोस) 2100 के पार है। आमतौर पर पानी में 1000एमजी/लीटर से कम टीडीएस सघनता के स्तर का पानी पीने के लिये उचित है।

जिन घरों में आरओ ख़राब है और ग़लती से उन्होंने पानी पी लिया तो ख़ैर नहीं, हाल के दिनों में कई लोग उल्टी, दस्त, पेट दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे हैं। धवलगिरी अपार्टमेंट में रहने वाले गिरीश बताते हैं कि कि दूषित पानी की वजह से उनके परिवार के ज्यादातर लोग बीमार हैं। पानी इतना ज़्यादा ख़राब है कि आरओ मशीन भी काम नहीं कर रहा. अब खरीदकर पानी पी रहा हूं।

हिमगिरी अपार्टमेंट में रहने वाले एसके सहगल ने बताया कि घर का आरओ सप्लाई के पानी की वजह से खराब हो गया है। मैकैनिक का कहना है कि सिल्ट और टीडीएस ज्यादा होने की वजह से आरओ चोक हुआ है। कुछ लोगों ने सप्लाई पानी पी लिया तो बीमार हो गए। नोएडा सेक्टर 34 की अधिकतर सोसायटियों में अथॉरिटी की ओर से सप्लाई का पानी बहुत कम मिल रहा है। प्रेशर इतना कम होता है कि ग्राउंड फ्लोर वालों को एक बाल्टी पानी भरने के लिए आधे घंटे इंतज़ाक करना पड़ता है।

आम तौर पर सोसाइटी में रहने वाले लोग पीने के लिए बाहर से पानी मंगाते हैं या फिल्टर करते हैं। वहीं घर के काम-काज और खाना बनाने के लिए सप्लाई वाटर का प्रयोग करते हैं। हाल के दिनों में स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि पीना-खाना तो छोड़िए धोने में भी स्किन डिज़ीज होने का ख़तरा बना रहता है।

चीयर्स डेस्क 

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