शराब बिक्री के मामले में यूपी सरकार अधिक सक्रिय

यूपी सरकार आबकारी नीति को लेकर कितनी सक्रिय है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने अपने दो वर्ष के कार्यकाल में इस नीति में आमूल चूल परिवर्तन कर दिया। यही नहीं, योगी सरकार ने शराब से राजस्व बढ़ाने के लिए भी नित नए कदम उठाए जिसमें वह कामयाब भी रही। इसी का नतीजा है कि अप्रैल 2018 से जनवरी 2019 के दौरान आबकारी राजस्व में 47.84 फीसद की अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।

पिछले कुछ दिनों में ही यूपी सरकार ने आबकारी नीति में कई बड़े परिवर्तन कर नकली शराब बनाने वालों पर रासुका लगाने और अन्य कड़े प्रावधान कर दिए। यही नहीं, शराब में मिलावट करने वालों पर अंकुश लगाने के लिए पूरे यूपी में पुलिस ने अभियान चलाया और यूपी में पहली बार ऐसा हुआ कि बड़े पैमाने पर करीब करीब हर जिले से नकली शराब पकड़ी गई। बाराबंकी और नोएडा में सबसे अधिक नकली और मिलावटी शराब पकड़ी गई।

हरियाणा से आने वाली शराब की धरपकड़ भी तेज़ हुई और हरियाणा की शराब को यूपी के रास्ते बिहार में ले जाकर बेचने वाले गिरोह का भी यूपी पुलिस ने ही भंडाफोड़ किया। इसके अलावा पूरे यूपी में नकली और मिलावटी शराब बनाने वाले जितने लोग भी पकड़े गए उन पर गंभीर धाराओं में मुकदमें दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया।

नियंत्रक महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि योगी सरकार के मुकाबले पिछली सपा और बसपा शासनकाल के दस वर्ष शराब कारोबारियों के लिए मौज भरे रहे। सरकारों की शह, आबकारी विभाग की अव्यवहारिक और गलत नीतियों का परिणाम रहा कि शराब कारोबारियों ने तो उपभोक्ताओं की जेब से तो हजारों करोड़ रुपए की अनुचित कमाई की। जिसका नतीजा रहा कि राजस्व बढ़ना तो दूर, अन्य प्रदेशों की तुलना में यहां महंगी शराब और अन्य अनियमितताओं से सरकारी खाते को 24805-96 करोड़ की क्षति पहुंची।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पड़ोसी राज्यों की तुलना में यहां उपभोक्ता शराब बियर का अधिक मूल्य चुका रहे थे। ऐसे में सरकारें मार्जिन को देखने हुए आबकारी शुल्क बढ़ाकर राजस्व बढ़ा सकती थीं। लकिन ऐसा नहीं किया गया और शराब व्यवसाइयों को शराब उपभोक्ता को लूटने की खुली छूट दे दी गई। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि गलत नीति के कारण प्रदेश में शराब की तस्करी बढ़ने का कारण भी माना गया है। रिपोर्ट कहती है कि अगर समय रहते इस दिशा में कार्य कर लिया गया होता तो सरकार और यूपी के शराब उपभोक्ताओं, दोनों ही लाभ में रहते।

चीयर्स डेस्क 

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