शराब पीने वालों में टीबी का खतरा तीन गुना ज्यादा

शराब पीने से क्या क्या नुकसान होते हैं, अपने यहां चिकित्सकों के लिए ये गंभीर विषय रहा है। हाल ही में टीबी दिवस पर एक कार्यक्रम में बताया गया कि यदि आप शराब बीड़ी, सिगरेट और तम्बाकू का सेवन नियमित कर रहे हैं तो संजीदा हो जाए क्योकि इससे टीबी जैसी घातक बीमारी का बैक्टीरिया जाग सकता है। शराब पीने वाले लोगों में टीबी होने का खतरा सामान्य लोगों के मुकाबले तीन गुना ज्यादा होता है। अक्सर देखा गया है कि शराब पीने वाले लोगों में लिवर सिरोरसिस, किडनी फैल्योर तथा अन्य पाचन समस्याएं के साथ ही टीबी के होने की संभावना अधिक होती है। यह जानकारी विश्व टीबी दिवस पर पीजीआई के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. आलोक नाथ ने दी। टीबी के चार फीसदी नए मरीज और 12 फीसदी पुराने मरीज होते हैं। एमडीआर टीबी में दवायें 50 प्रतिशत ही कारगर है। एमडीआर टीबी की बेहतर दवाओं के आने से अब 24 माह की जगह 9 से 12 माह के इलाज में मरीज ठीक हो सकता है। बशर्तें मरीज दवाई और इंजेक्शन नियमित ले।

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90 फीसदी लोगों में टीबी का बैक्टीरिया होता है

लोहिया संस्थान के चेस्ट रोग विभाग के इंचार्ज डॉ हेमंत कुमार बताते हैं कि देश में 90 प्रतिशत लोगों में टीबी का बैक्टीरिया होता है लेकिन यह शरीर में शांत पड़ा रहता है। डॉ. हेमत बताते है कि जो लोग नियमित शराब व धूम्रपान करते है उनमें रोगों से लड़ने की ताकत कम हो जाती है। इसकी वजह से टीबी का बैक्टीरिया ताकतवर हो जाता है। जो शरीर पर हमला कर देता है और इंसान टीबी की चपेट में आ जाता है। डॉ हेमंत बताते है कि शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम होने की एक वजह ज्यादा शराब का सेवन हैं। आकडों की माने तो शराब के लती लोग अधिक टीबी का शिकार हो रहे है।

ब्रेन टीबी जानलेवा हो सकता है

पीजीआई  न्यरोलॉजी  विभाग के प्रमुख डॉ सुनील प्रधान बताते हैं कि टीबी सिर्फ फैफड़े तक सीमित नहीं है। बल्कि रीढ़ की हड्डी और दिमागी टीबी (ब्रेन टीबी ) तक हो सकती है। दिमागी टीबी में सिर में दर्द, धुधला दिखाई देना थकान व उल्टी आदि इसके प्रमुख कारणा हैं। ब्रेन टीबी बच्चों ओर बुजुर्गों मे बहुत खतरनाक है। इसमें शरीर लकवाग्रस्त होने के साथ ही रोशनी जाने का खतरा अधिक होता हैं। मरीज कोमा में चला जाता है।

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