शराब के नशे में घरेलू हिंसा करती है बच्चों पर नकरात्मक असर

घरों का वातावरण, विशेषकर न्यूक्लियर फैमिली वाले घरों का माहौल और बाल अपराध में गहरा रिश्ता होता है। कुछ ऐसे घरों, जहां के बड़े यानी अभिभावक की श्रेणी वाले लोग जैसे कि बाप, बड़ा भाई शराब पीकर झगड़ा करते हैं, उन घरों में रह रहे युवाओं पर किए गए एक हालिया अध्ययन में ये बात उभर कर सामने आई है। परिवार में शराब पीकर घरेलू हिंसा प्रमुख कारण है जिन्होंने युवाओं के दिमाग में नकारात्मक विचार पैदा कर दिए।

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घर पर बच्चे जो कुछ भी देखते हैं, उसका उनके दिमाग पर गहरा असर होता है। बच्चे मूल रूप से अपने माता पिता की नकल करते हैं और अक्सर प्रक्रिया में विद्रोह करते हैं। उदाहरण के लिए, यदि वे शराब के नशे में घरेलू हिंसा देखते हैं, तो वे हिंसक होने की कोशिश भी करते हैं। जब वे घर से बाहर निकलते हैं तो अक्सर यह हिंसा अपराध का रूप ले लेती है। ये भी देखा गया है कि बच्चों पर पढ़ाई में अच्छा करने के लिए माता पिता का दबाव और स्मार्टफोन और गेमिंग की अनियंत्रित लत ने भी नकारात्मक सोच को बढ़ावा दिया है।

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इस अध्ययन में 200 से अधिक अपराधी किशोर किशोरियों के साथ बातचीत की गई जिसमें 165 लड़के और 35 लड़कियां, जिनकी उम्र 12 से 17 साल, जिन्हें अलग अलग (बाल सुधार गृह) में रखा गया था। इनमें वे बच्चे शामिल थे जिन पर चोरी, छेड़छाड़, बलात्कार और आत्महत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया था। एक मामले में कक्षा 11 की लड़की थी जिसने अपने पिता की बंदूक से खुद को गोली मार ली थी। जब इन लोगों से बात की गई तो पाया गया कि उनके मन में बहुत पश्चाताप नहीं था।

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नशीले पदार्थों की लत के मामले में तो ये समस्या कुलीन पृष्ठभूमि के युवाओं में अधिक देखी गई जैसे कि चिकित्सा क्षेत्र में पेशेवरों के बच्चे। अगर माता पिता बहुत अधिक कमाई करने में व्यस्त हैं, तो वे यह नोटिस करने में विफल हो सकते हैं कि उनका बच्चा किस चीज के लिए पैसा खर्च कर रहा है। माता पिता बस यही चाहते हैं कि बच्चे अपनी इच्छानुसार खुश रहें। कई बार, यह बच्चों को ड्रग्स लेने के लिए प्रेरित करता है, जो बाद में अक्सर लत का रूप ले सकती है।

चीयर्स डेस्क

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