शराब और सराब पर छिड़ी राजनीतिक बहस !

चाहे अनचाहे शराब का जिक्र राजनीति में कहीं न कहीं आ ही जाता है। ऐसा ही तब हुआ जब गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत मेरठ में एक जनसभा से की, जहां उन्होंने शब्द ’सराब’ का प्रयोग किया। इस पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए ट्वीट किया है नफरत को फैलाने वाले शराब और सराब का अंतर नहीं जानते। जबकि प्रधानमंत्री ने ’स…रा…ब..’ से बचने की सलाह दी थी।

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मेरठ में भाजपा की चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ’यहां पर महामिलावट में भी कौन ज्यादा मिलावट करता है इस पर भी स्पर्धा लग गई। एक तरफ सपा, बसपा और आरएलडी यहां पर आए’। उन्होंने कहा, ’अब इसको अलग तरीके से देखिए। सपा का ’स’ आरएलडी का ’र’ और बसपा का ’ब’…..मतलब ’सराब’। उन्होंने कहा कि अच्छी सेहत के लिए ’सराब’ से बचना चाहिए या नहीं बचना चाहिए, ये सराब आपको बर्बाद कर देगी’।

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इसके जवाब में अखिलेश यादव ने ट्विटर पर लिखा, ’आज टेली-प्रॉम्प्टर ने यह पोल खोल दी कि सराब और शराब का अंतर वह लोग नहीं जानते जो नफरत के नशे को बढ़ावा देते हैं। सराब उर्दू शब्द है, जिसका अर्थ मृगतृष्णा है, उनके अनुसार यह वह धुंधला सा सपना है जो भाजपा पांच साल से दिखा रही है लेकिन जो कभी हासिल नहीं होता। अब जब नया चुनाव आ गया तो वह नया ’सराब’ दिखा रहे हैं।

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उधर, राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद की पार्टी ने कि पांच साल में ’स’ और ’श’ का अंतर नहीं सीखा! लो हम सिखाते हैं….शाह का श, राजनाथ का र और बुड़बक बीजेपी का ब! बन गया शराबबंदी में धड़ल्ले से बिकता गुजराती शराब!’

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ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि शब्द शराब के समान किसी शब्द पर चुनाव के दौरान बहस छिड़ी हो। इससे पूर्व यूपी विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ही वादा किया था कि अगर वे सत्ता में आए तो ’शाम की दवा’ के दाम कम कर देंगे। लेकिन उनके इस वाक्य के बाद भी किसी प्रकार की बहस नहीं छिड़ी थी।

चीयर्स डेस्क

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