विदेशी शराब ने लद्दाख की छंग को पीछे कर दिया

हाल ही में कश्मीर से अलग केन्द्र शासित राज्य बना लद्दाख भी अपनी लोकल शराब के लिए उसी तरह से मशहूर है जैसे गोवा अपनी फेनी के लिए। यहां की छंग बहुत मशहूर है और वहां के आयोजनों में इसे सर्व भी किया जाता है। वहां शराब खुले आम मिलती है। पहले वहां छंग (जौ की शराब) पीने की परंपरा बड़ी जबर्दस्त थी। लेकिन धीरे धीरे इसका स्थान बियर ने ले लिया और छंग पीछे रह गई। लेह की ही दूसरी शराब आराक (चावल की शराब) का भी वही हाल हुआ जो छंग का हुआ, हालांकि इसके सामाजिक परिणाम अच्छे नहीं रहे और लेह लद्दाख की स्थानीय पहचान बन चुकी छंग और अराक को बाजार ने नकार दिया। लेह लद्दाख का हाल ये है कि बियर ड्राई डे को छोड़कर हर समय उपलब्ध है, जबकि छंग के लिए ऑर्डर करना पड़ता है। क्योंकि इसे पहले से तैयार किया जाता है इसीलिए बियर  अब हर छोटे कार्यक्रम का हिस्सा बनती जा रही है।

दूसरी ओर, छंग ज्यादातर बड़े आयोजनों जैसे शादियों और अंतिम संस्कारों में दिखती है। इसलिए, युवाओं का आसानी से उपलब्ध  बियर की ओर ज्यादा झुकाव है, महंगी होने के बावजूद, लोग मुख्य रूप से पश्चिमी शराब का अधिक सेवन करने लगे हैं। एक सैलानी का कहना है कि “पहले छंग लद्दाख में एकमात्र शराब थी और ज्यादातर सामाजिक समारोहों के दौरान लोग इसका सेवन करते थे। हालांकि, पश्चिमी हार्ड ड्रिंक्स की शुरुआत के साथ चीजें बदल गई हैं और इसलिए लोगों का पीने के प्रति रुझान बढ़ा है।

अब लोग, विशेष रूप से युवा, ज्यादा पीने लगे हैं जिसके बाद वे अपना आपा खो देते हैं। इसीलिए कहा जाने लगा है कि शराब लद्दाखी युवाओं के लिए ठीक नहीं है, और ये लद्दाख की सामाजिक और आर्थिक भलाई के लिए एक बड़ा खतरा है। लेह लद्दाख के स्थानीय लोग शराब की बढ़ती खपत से बहुत चिंतित हैं कि विदेशी शराब वहां के लोगों का जीवन बर्बाद कर रही है। कुछ लोगों ने इसके खिलाफ मोर्चा भी खोला हुआ है। चांगस्पा, लेह में सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है, जहाँ होटल और गेस्ट हाउस सबसे ज्यादा हैं, इसके आसपास के क्षेत्र में कोई बार या शराब की दुकान नहीं है। यह पूरी तरह से चांगस्पा के निवासियों द्वारा बार और शराब की दुकानों की स्थापना के खिलाफ उठाए गए सख्त हस्तक्षेप के कारण संभव हुआ  है।”

हालांकि, लद्दाख में स्थानीय निकाय और संस्थाएं हैं जो शराब की बढ़ती आदत के प्रति संवेदनशील हैं। उदाहरण के लिए, लद्दाख के बौद्ध संघ की महिला विंग, महिला गठबंधन, पुलिस विभाग, लेह और स्वयंसेवी डॉक्टर शराब के खतरे के बारे में लद्दाख में ग्रामीणों के बीच जागरूकता और प्रसार कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ गांवों में अमा त्सोगस्पास, शादियों और अन्य सामाजिक समारोहों के दौरान रम और बियर पर प्रतिबंध लगाने में सफल रहे हैं और कुछ शराब की मात्रा पर कैप लगाने में सफल रहे हैं। महाबोधि करुणा अस्पताल में एक नशामुक्ति केंद्र भी है, जहां परामर्शदाता और मनोवैज्ञानिक उन्हें इनडोर गेम्स जैसी गतिविधियों में भाग लेने और एक-दूसरे के साथ बातचीत में शामिल होने के लिए मार्गदर्शन करते हैं।

चीयर्स डेस्क

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