विदेशियों को भाती है सींग से बनी बोतल

यूपी में सम्भल के हड्डी व सींग से जुड़े कारोबारी अपनी कला को आधुनिकता की दौड़ में न केवल दौड़ा रहे हैं बल्कि तकनीक के गुर सीखकर आगे बढ़ रहे हैं।  सींग का बीयर मग, सींग का चश्मा, सींग की सीटी, सींग का कंघा बनाकर विदेशों में सम्भल की छाप छोड़ चुके यहां के व्यवसायी अब सींग से बोतल बनाने में जुटे हैं। इस बोतल को लेकर पश्चिम देशों से बड़े स्तर पर डिमांड हुई तो यहां के कारीगर समय से पहले ही इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुट गए हैं।

खोखले सींग को विभिन्न चरणों में शुद्ध कर इसे मानव शरीर के अनुकूल बनाने की प्रक्रिया में जुटे हैं ताकि, इसका शरीर की त्वचा पर कोई साइड इफेक्ट न हो। इसके अलावा इस बोतल का ऊपरी सिरा पीतल के ढक्कन का होगा। जो इसे न केवल आकर्षक बनाएगा बल्कि बोतल की लाइफ भी बढ़ा देगा। इसकी खासियत है कि यह गिरने से न टूटेगी और न ही पर्यावरण को प्रदूषित करेगी।

बोतल की मांग 

उपनगरी सराय तरीन में हैंडीक्राफ्ट का काम दुनिया भर में प्रसिद्ध है। अब सींग कारोबारियों ने कारीगरों से पेयजल के लिए बोतल बनवाने का काम शुरू कराया है। इस बोतल की मांग अमेरिका, कनाडा, इटली, जर्मनी, जिम्बाबे, कीनिया और वेस्टइंडीज देशों में सबसे ज्यादा है। एक बोतल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 400 से 500 रुपये और नक्कासी वाली बोतल की कीमत एक हजार रुपये तक है। बीयर या व्हिस्की कप की कीमत 800 रुपये से ऊपर है।

विदेशियों को पसंद है सींग की बोतल 

हैंडीक्राफ्ट निर्यातकों की मानें तो इस बोतल की मांग विदेश में से आ रही है। अंग्रेज लोग सींग के बनी बोतल को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। सप्लायर मोहम्मद इरफान कुरैशी ने बताया कि अमेरिका, कनाडा, यूरोप तथा साउथ अफ्रीका और इटली में सींग से बनी बोतल की मांग ज्यादा है। एक बोतल बनाने में 250 रुपये का खर्च आता है। एक मजदूर दिन में 30 से 40 बोतल बनाकर तैयार कर सकता है। अभी तक उनके पास से बीस हजार से अधिक बोतलें भेजी जा चुकी हैं। पहले विदेश में सींग से बने मग की मांग थी। इस बार ज्यादा है। कारोबार को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कारीगरों को को आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए ताकि सींग का कारोबार और ज्यादा बढ़ सके।

  चीयर्स डेस्क 

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