विंध्याचल डिस्लेरी में बगैर रिकॉर्ड तैयार हो रही लाखों की देशी शराब

विंध्याचल डिस्लेरी जो कि मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में स्थित है वहां लाखों रुपए की लागत की शराब बगैर रिकार्ड ही तैयार की जा रही है। जबकि यहां एक बॉटल शराब के निर्माण से पहले ही उसे रिकार्ड में चढ़ाना अनिवार्य होता है।

लेकिन विंध्याचल डिस्लेरी में दो दिन पूर्व जो देखने को मिला वह चौंकाने वाला था। दस बड़े-बड़े बेड में मटेरियल भरा हुआ था। लेकिन बात यदि रिकार्ड की करे तो कुछ भी नहीं चढ़ा रखा था। बेड में भरे मटेरियल को मापे तो 427 पेटी मसाला और 261 पेटी देशी शराब की तैयार हो सकती थी। जिसकी लागत आबकारी ड्यूटी के अनुसार ही 12 लाख से अधिक की होती है। जबकि यदि इस पर १० प्रतिशत वेट टैक्स लगा दिया जाए तो यह कीमत और ज्यादा हो जाती है। उल्लेखनीय है कि जिले में अवैध शराब का कारोबार तेजी से पनप रहा है। लेकिन इस अवैध शराब में किसका सहयोग है। यह जांच का विषय है।

लेकिन जिस तरह से विंध्याचल डिस्लेरी में शराब का निर्माण किया जा रहा। वह भी शक के दायरे में आ जाता है। पूरे मामले को लेकर आबकारी कमिश्रर को इस संबंध में शिकायत की गई है। लेकिन अभी वहां से किसी प्रकार का कोई एक्षन देखने को नहीं मिला है। प्रयोगशाला है पर केमिस्ट नहीं- शराब के निर्माण को लेकर डिस्लेरी में शासन के नियमों के अनुसार रसायनिक प्रयोग शाला है। लेकिन केमिस्ट नहीं है। अप्रशिक्षित कर्मचारी के माध्यम से यह सारा कारोबार किया जा रहा है। जो गलत है।

महिलाएं भी मिली काम करते- शराब के निर्माण में कई जगह ऐसी होती है जहां महिला मजदूरों या कर्मचारियों का जाना प्रतिबंधित है। लेकिन वहां भी महिलाओं की मौजूदगी देखी गई। स्टाक रूम लॉक, लेकिन बाहर रखी थी पेटियां – स्टाक रूम में रेवेन्यू लॉक होता है। जो किसी वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी में खोला जाता है। लेकिन जिस समय निरीक्षण किया गया। वहां न तो कोई जिम्मेदार या वरिष्ठ अधिकारी था। फिर भी कुछ पेटियां स्टाक रूम से बाहर रखी हुई थी। जो शराब वहां बनाई जा रही थी। उसमें से कई में होलोग्राम नहीं था। जबकि जिन बॉटल में होलोग्राम था वह सामने या ऊपर की जगह पीछे लगा हुआ था। जो बहुत गौर से देखने पर नजर आ रहा था।

पहले भी लिखा कार्रवाई को लेकिन दब गए पत्र- इससे पहले तत्कालीन कलेक्टर कर्मवीर शर्मा द्वारा भी डिस्लेरी में किए गए निरीक्षण के दौरान कई तरह की खामियां मिली थी। वहीं निर्वाचन के दौरान सामने आई अनियमिता पर भी आबकारी आयुक्त को कार्रवाई के लिए लिखा गया था। जिसमें लाइसेंस के नियमों के अनुसार उनका उल्लंघन किया जा रहा था। उस समय भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

जिला आबकारी अधिकारी राजगढ़ का कहना है कि यह बात सही है कि वहां कई तरह के नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। जिसको लेकर मैंने कमिश्रर को भी शिकायत की है। रिकार्ड पर न चढ़ाते हुए शराब बनाने का काम किया जा रहा था। जो बहुत ही गलत है।

चीयर्स डेस्क 

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