रोक के बाद भी बिक रही प्लास्टिक की बोतलों में शराब

छत्तीसगढ़ सरकार दावे कुछ करती है और होता कुछ और है। हाल ही में सरकार ने राज्य में प्लास्टिक को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया है, लेकिन खुद ही प्लास्टिक की बोतलों में शराब बेच रही है। राज्य की सभी शराब दुकानों में धड़ल्ले से प्लीस्टिक की बोतलों में शराब बेची जा रही है। यह पर्यावरण के लिए काफी नुकसान पहुंचा रहा है।

आबकारी अधिकारियों की माने तो विभाग ने प्लास्टिक की बोतलों में शराब की बिक्री पर रोक लगा दिया है। मंत्रालय ने आदेश जारी कर सभी आबकारी अफसरों को निर्देशित किया कि देशी शराब कांच की बोतल में बेंची जाएं प्लास्टिक की बोतल को बंद किया जाए, लेकिन इस आदेश का पालन कहीं होता नहीं दिख रहा है। गौरतलब है कि रायपुर में लगभग 10-11 लाख लीटर देशी शराब की हर महीने बाटलिंग होती थी। खपत की बात की जाए तो औसतन हर महीने 8 लाख लीटर देशी शराब की खपत राजधानी में है। इसकी कीमत 50 करोड़ रुपए तक है। ऐसे में इतनी मात्रा में शराब को बेचने के लिए हजारों किलो प्लास्टिक की बॉटलों की मांग थी। यही प्लीस्टिक की बॉटल बिकने के बाद कचरे के ढेर में फेंक दी जाती हैं और पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा रही हैं।

आबकारी विभाग की माने तो उन्होंने प्लास्टिक बॉटल में शराब बेचने का निर्णय मिलावट को रोकने के लिए किया था, लेकिन इसके चलते पर्यावरण को अधिक नुकसान हो रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि अंग्रेजी शराब कांच के बॉटल में बेची जाती है। उसमें मिलावट ने होने पाए इसके लिए बॉटलों में सीलिंग की जाती है। सील टूटने से ग्राहक यह जान जाता था कि शराब में गड़बड़ है। देशी शराब में कांच के बॉटल में सीलिंग नहीं होती थी, इसलिए विक्रेता उसमें मिलावट करके मुनाफा कमाता था। इसलिए विभाग ने उसका जगह प्लास्टिक की बाटल का उयोग करना शुरू किया। पर्यावरण को हो रहे नुकसान के चलते शासन ने इसे फिर से बंद करने का आदेश दिया है, लेकिन फिलहाल सभी शराब की दुकानों में धड़ल्ले से प्लीस्टिक की बोतलों में शराब बिक रही है।

पर्यावरण की सुरक्षा से अधिक स्टॉक की चिंता प्लास्टिक की बोतलों में शराब बेचने पर रोक का आदेश जारी हो गया है। इसके बाद भी प्लीस्टिक की बोतलों में देशी शराब धड़ल्ले से बिक रही है। जब इसके बारे में जिले के आबकारी अधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि शासन के आदेश से पहले प्लीस्टिक की बोतलों में शराब की पैकिंग लाखों लीटर की हो चुकी है। ऐसे में उसका नुकसान नहीं उठाया जा सकता है। इसे देखते हुए शासन ने दो महीने की छूट दिया है कि दिसंबर तक प्लास्टिक की बोतलों में शराब बेची जा सकती है। जनवरी से कांच की बोतलों में शराब बेंची जाएगी। इससे साफ है कि पर्यावरण को बचाने की चिंता करने वाली सरकार को सबसे अधिक चिंता अपने फायदे की भी है।

चीयर्स डेस्क 

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