रात में बढ़ जाती है डिमांड मिस इंडिया, बंटी बबली और माधुरी की

यूपी के गांव में इन दिनों बंटी बबली, मिस इंडिया व माधुरी और मस्ती की डिमांड बढ़ गई है। “शाम होते ही यूपी के हजारों कस्बों में इनके दीवाने सड़कों पर उतर आते हैं। पिछले एक साल में देखा जाए तो बंटी बबली, मिसइंडिया और माधुरी ने 125 करोड़ से अधिक की कमााई की है। यूपी सरकार भी इनकी कमाई से खुश है और इन पर कोई रोक नहीं लगाना चाहती है। बात हो रही है यूपी  के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिकने वाली देसी शराब की ब्रांड की। इनमें से अधिकतर ब्रांड उत्तर प्रदेश में ही बन रहे है।

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यूपी आबकारी विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 25 करोड़ लीटर देसी शराब साल भर में उत्तर प्रदेश के बजारों में खप जाते हैं। आबकारी विभाग में 2018-19 के वित्तीय वर्ष में उत्तर प्रदेश में 125 करोड़ बोतल प्रमुख 10 ब्रांडों के बेजने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इनमें से माम ब्रांड उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों में बनते हैं।

कम फैंसी नहीं हैं कई देशी ब्रांड

इंडिया ग्लाइकोल का ब्रांड है बंटी बबली इसकी मार्केट खपत 5.3 करोड़ बोतल की है। इसी तरह बेब की ब्रांड मिस इंडिया है। इसकी 3.2 करोड़ बोटल की खपत प्रति वर्ष है। रेडिको खेतान मस्ती ब्रांड से अपनी शराब बेचती है। यह करीब 3 करोड़ बोतल बिक जाती है। सरसादी लाल का फाइटर और लॉर्ड के ब्लू लाइन भी मार्केट में खूब बिकता है।

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आबकारी विभाग ने बताया कि विदेशी शराब की ज्‍यादातर बिक्री लखनऊ, कानपुर, मेरठ, सहारनपुर और अमरोहा तक सीमित है। पिछले कुछ सालों में यूपी में आबकारी विभाग 10000-15000 करोड़ रुपये के कर राजस्‍व की वसूली शराब से करता था लेकिन वर्ष 2018-19 में 23918 करोड़ रुपये इस मद से आए। बता दें कि देसी शराब में 25 से लेकर 42.8 प्रतिशत तक ऐल्कॉहॉल होता है।

आंकड़ों के मुताबिक यूपी में सबसे ज्‍यादा बंटी बबली ब्रैंड की मांग रही। इसके बाद मिस इंडिया देसी शराब का नंबर आया। यूपी आबकारी विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि शराब के वितरण और खपत की प्रक्रिया को ज्‍यादातर जिलों में सुव्‍यवस्थित किया गया है। इससे शराब की तस्‍करी में कमी आई है और राज्‍य के राजस्‍व में होने वाले नुकसान में कमी आई है। ऐसा पहली बार है कि राजस्‍व 20 हजार करोड़ रुपये को पार कर गया है।

चीयर्स डेस्क

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