रम के सहारे राजस्थान में फसलों को उगाने का चलन

आदमी ही नहीं, फसलें भी शराब की आदी होती जा रही हैं और नशे का असर भी ऐसा कि पैदावार डेढ़ गुना तक बढ़ जाती है। यह दावे फसलों को शराब पिलाने वाले किसान कर रहे हैं। मामला बड़ा दिलचस्प है, राजस्थान के सीकर जिले के चिड़ावा के बहुत से किसान दलहनी फसलों में देशी शराब का छिड़काव कर रहे हैं किसानों का कहना है कि देशी शराब का नशा फसलों को खोखला करने के बजाए पैदावार बढ़ाता है। हालाँकि कृषि वैज्ञानिक देशी शराब से पैदावार बढ़ने के दावे को नहीं मान रहे हैं लेकिन इस पर रिसर्च करने की बात जरूर कह रहे हैं।

दूसरी तरफ राजस्थान के सीबर के किसान दलहन की फसलों पर देशी शराब और रम का स्प्रे पूर्व की तरह ही नियमित रूप् से कर रहे हैं। ये पहली बार सुनने को मिल रहा है, इससे पहले सब्जियों में गन्दे पानी के प्रयोग किए जाने की खबरें आती रही हैं लेकिन शराब से पनपने वाली खेती हमारे और जमीन की सेहत पर कितना असर डालती है, इस बारे में सोचने की जरुरत है क्यूंकि इस इलाके में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों में इस जुगाड़ू तकनीक के इस्तेमाल का रुझान तेजी से बढ़ता जा रहा है

दूसरी तरफ किसानों का यह दावा है कि जब वे दलहन की फसल पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करते हैं तो इन कीटनाशक दवाओं का खराब असर किसानों के शरीर पर भी पड़ता है और कई बार कीटनाशक की दुर्गन्ध से किसान बीमार भी हो जातें हैं। किसानों का यह भी कहना है कि बाजार में कीटनाशक दवाएँ बहुत महंगी मिलतीं हैं और देशी शराब सस्ती मिलती है। उनका कहना है की एक बीघा जमीन में शराब के छिड़काव पर तकरीबन 100 रुपए का खर्चा आता है जबकि इतनी ही कृषि भूमि पर कीटनाशक के छिड़काव का खर्चा तकरीबन 500 रूपये के ऊपर होता है।

नीरज महेरे, राजस्थान के सीकर से


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