ये कैसी शराबबंदी ?

बिहार मे शराबबंदी लागू है, पर फिर भी वहां जब तब शराब पकड़ी जाती है और शराब पिए लोग भी।  हाल के दिनों में बिहार की कुछ निचली अदालतों ने अपने फैसलों से शराब बंदी के औचित्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। बिना सोचे समझे और अपने विवेक का इस्तेमाल किये बगैर दिए गए निर्णय ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बक्सर की एक अदालत ने पुलिस के कहने पर तीन लोगों को शराब पीने के आरोप में जेल भेज दिया। जेल गए लोगों ने रिहाई के लिए हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट के न्यायाधीश यह सुन कर दंग रह गए कि बिना मेडिकल जांच के पुलिस ने उन्हें शराब पीया हुआ मान कर गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय उनके पास से शराब भी बरामद नहीं हुई थी। इसके बावजूद पुलिस के कथन को सत्य मान कर बक्सर की अदालत ने तीन लोगों को शराबबंदी कानून में जेल भेज दिया। दरअसल एक पुराना वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन तीनों को शराब पीते दिखाया गया था। बस पुलिस ने बिना किसी छानबीन के उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने भी बिना किसी साक्ष्य के उन्हें जेल भेज दिया।

दूसरी घटना किशनगंज की है। वहां हत्या के एक मामले में बरी हो चुके व्यक्ति को फिर से उसी केस में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, और कोर्ट ने आंख मूंद कर पुलिस की बात मान उन्हें जेल भेज दिया। लगता है अदालतों का यही काम रह गया है कि वे पुलिस की बात पर आंख मूंद कर भरोसा कर लेती हैं, उनके पास विकल्प भी क्या है। सत्य की परख वह कैसे करें, लेकिन विवेक के साथ उन्हें पुलिस से साक्ष्य की मांग करनी चाहिए? तो फिर दूध का दूध और पानी का पानी कैसे होगा? स्पष्ट है की इन मामलों में निचली अदालतों ने बिना साक्ष्य के आदेश और निर्देश दिए।

वह तो भला हो कि पटना हाईकोर्ट का, जिसने पुलिस की धूर्तता पकड़ ली और पहले दो मामलों में जेल में बंद लोगों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।पुलिस को फटकार। साथ ही निचली अदालत के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी भी की। इससे अदालतों की मर्यादा की रक्षा हो सकी।निचली अदालतों के ऐसे ग़ैर जिम्मेवाराना रवैये से पूरी न्यायिक प्रक्रिया पर लोगों को संदेह पैदा होता है। न्यायपालिका का सम्मान कम होता है। आवश्यकता है सचेत और सजग होकर साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देने की।

हालांकि मोटे तौर पर भारतीय न्यायपालिका ने शानदार काम किया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ या सामाजिक बदलाव में उसने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। लेकिन कुछ एक गलतियां इन उपलब्धियों को धूमिल कर देती हैं।

 चीयर्स डेस्क 

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