यूपी शराब बिक्री घोटाले की सतर्कता जांच जरूरी

यूपी में शराब की बिक्री में कितने खेल खेले गए हैं, इस पर सीएजी की रिपोर्ट खासी गंभीर है। इस रिपोर्ट में एक्स डिस्टलरी प्राइस और एक्स ब्रेवरी प्राइस में बढ़ोतरी के कारण डिस्टलरियों को 7168.63 करोड़ रुपये के अनुचित लाभ पहुंचाए जाने के मामले में सरकार द्वारा सतर्कता जांच करने की सिफारिश भी की गई है। जबकि यूपी के तत्कालीन आबकारी आयुक्त ने एमजीक्यू के तहत 15 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था लेकिन तत्कालीन सरकार ने इस पर ध्या नही नहीं दिया।

रिपोर्ट के अनुसार 2008 से 2018 के बीच डिस्टलरी और बे्रवरी ही नहीं बल्कि थोक विक्रेताओं को भी बढ़ाए गए दाम और छूट के जरिये अनुचित लाभ पहुंचाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस पूरे प्रकरण की जांच इसलिए जरूरी है कि अगली बार यूपी के आबकारी विभाग को किसी भी सरकार में इस प्रकार के नियम कानून बनाने की खुल छूट न मिले।

रिपोर्ट यह भी कह रही है कि इतने बड़े घोटाले में यदि यूपी के आबकारी विभाग के संलिप्त होने और उसकी भूमिका पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो मुमकिन है कि भविष्य में भी इसी तरह की सरकारें आती रहें और किसी एक शराब व्यवसायी के इशारे पर शराब के दामों का निर्धारण कर यूपी के शराब उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डालती रहें। सीएजी की रिपोर्ट कहती है कि इस प्रकरण की गंभीरता को यूपी सरकार हलके में नहीं ले सकती।

सीएजी की इसी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2008-09 के लिए आबकारी नीति को अंतिम रूप देने के दौरान अंग्रेजी शराब और बीयर का न्यूनतम गारंटी कोटा (एमजीक्यू ) तय किये जाने के बारे में दिसंबर 2007 में तत्कालीन आबकारी आयुक्त ने शासन को प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि कोटा बढ़ाना समय की आवश्यकता है और नहीं बढ़ाने पर राजस्व नुकसान हो सकता है।

लेकिन उसी शराब व्यवसायी के इशारे पर तत्कालीन सरकार ने आबकारी आयुक्त के प्रस्ताव को तवज्जो नहीं दी और समय की कमी का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव पर कार्रवाई नहीं की गई। 2009-10 से 2017-18 तक की हर साल लाई गई वार्षिक आबकारी नीति में भारत में निर्मित अंग्रेजी शराब और बियर के न्यून्तम गारंटी कोटा (एमजीक्यू )निर्धारण के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया। रिपोर्ट के अनुसार अगर आबकारी आयुक्त के प्रस्ताव में 15 प्रतिशत की वृद्धि की दर को स्वीकार कर लिया गया होता तो सरकार को इतने राजस्व का नुकसान न होता।

चीयर्स डेस्क

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