यूपी में सुधरने लगा भूगर्भ जलस्तर

यूपी में पीने लायक पानी की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार भूगर्भ जल स्तर सुधारने के लिए कई स्तरों पर प्रयास कर रही है।इसके सकारात्मक नतीजे भी सामने आ रहे हैं। यूपी के बुंदेलखंड, विन्ध्य और शहरी क्षेत्रों से सुकून देने वाली खबर है। लगातार रसातल में जा रहा भूगर्भ जल का स्तर इन क्षेत्रों में अब स्थिर होने लगा है। प्रदेश सरकार के भूजल रिचार्ज अभियान और तालाबों की खुदाई तथा जीर्णोद्धार से ऐसा संभव हुआ है। इस अभियान में जनता भी सहभागी हो गई है।

इस बदलाव का असर कमोबेश प्रदेश के सभी हिस्सों में दिख रहा है। अमेठी, कुशीनगर, बरेली व जालौन में भूजल स्तर सुधरा है। हालांकि लखनऊ, कानपुर सहित महानगरों व गांवों में स्थिति चिन्ताजनक बनी हुई है। भूगर्भ जल पर ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कुल 820 ब्लाकों में  से 91 ब्लॉकों में स्थिति अभी भी चिंताजनक है। 2010से पहले इस श्रेणी में 113 ब्लाक थे। 729 ब्लाकों में हालात सुधरे हैं। जिन ब्लॉकों में पीने के पानी समस्या ज्यादा है इनकी संख्या 59 से घटकर 48 रह गई है।

तालाबों का जीर्णोद्धार : भूजल स्तर में सुधार के पीछे सबसे बड़ा कारण पिछले डेढ़ दशक के दौरान खोदे तालाब और पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार किया जाना है। 2010 से 2019 के बीच ग्राम्य विकास विभाग ने 2,18,150 तालाबों का निर्माण कराया। लघु सिंचाई विभाग ने 65 हजार तालाब बनवाए। कृषि विभाग ने खेत-तालाब योजना के तहत पिछले तीन सालों में 10,328 खेतों को तालाब का रूप दिया।

बुन्देलखंड और विन्ध्य इलाकों में हालात सुधरे: बुन्देलखंड एवं विन्ध्य क्षेत्र के भूजल के स्तर में काफी सुधार आया है। पिछले दशक में दोनों क्षेत्रों को मिलाकर कुल 54 ब्लाक अतिदोहित व क्रिटिकल श्रेणी में थे। अब मात्र आठ ब्लाक ही अतिदोहित एवं क्रिटिकल की श्रेणी में रह गए हैं। इन दोनों क्षेत्रों में पानी की गम्भीर समस्या को देखते हुए सरकार ने तालाबों के निर्माण के लिए अलग से कई विशेष योजनाएं चला रखी हैं। पानी की बर्बादी रोकने के लिए आम लोगों में भी लोगों में जागरूकता आई है।

चीयर्स डेस्क 

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