यूपी में भू-जल सुधार की कवायद शुरू

यूपी में गिरते भू-जल स्तर को सुधारने की कवायद तेज होने लगी है। जल्द अवैध कब्जों से तालाबों को मुक्त करवाने और अतिक्रमण हटवाने का खाका बनाया गया है। इसके लिए राजस्व परिषद ने सभी जिलों के डीएम से तालाबों का ब्योरा मांगकर जीर्णोद्धार की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

जल संरक्षण न होने से प्रदेश में भू-जल स्तर गिरता जा रहा है। तालाबों और झीलों से अतिक्रमण न हटने से बारिश का पानी भी दोहन के मुकाबले संचित नहीं हो पा रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए शासन ने सभी डीएम से राजस्व अभिलेखों में दर्ज सार्वजनिक तालाबों की मौजूदा स्थिति का ब्योरा मांगा है। राजस्व परिषद के उप भूमि व्यवस्था आयुक्त भीष्म लाल वर्मा ने जिला, ब्लॉक और पंचायतों के तालाबों की डिटेल देने को कहा है। साथ ही, उन तालाबों का भी ब्योरा मांगा गया है, जिनका अतिक्रमण हटवाकर जीर्णोद्धार करवाया गया था।

औद्योगिक सेक्टर भू-जल पर निर्भर

यूपी में करीब 70% कृषि कार्य भूगर्भ जल संसाधनों पर निर्भर है। लोगों की पेयजल की 80% और औद्योगिक सेक्टर की पानी की 85% जरूरत भू-जल से पूरी हो रही है। पेयजल योजनाओं के तहत 630 शहरी क्षेत्रों में रोजाना करीब 5,200 मिलियन लीटर और ग्रामीण क्षेत्रों में 7,800 मिलियन लीटर से अधिक भूजल का दोहन हो रहा है। भूगर्भ विभाग के अधिकारियों की मानें तो वाराणसी, कानपुर और इलाहाबाद की स्थिति काफी नाजुक है।

हर साल 70 सेंटीमीटर तक हो रही गिरावट

प्रदेश में हर साल जिलों के भूजल स्तर में औसतन 70 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की जा रही है। लखनऊ में 2012 से 2018 तक भूजल में 13 मीटर तक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। लखनऊ में करीब 70, वाराणसी में 68, कानपुर में 65, इलाहाबाद में 62, मुजफ्फरनगर में 49 और आगरा में 45 सेंटीमीटर तक की गिरावट हर साल दर्ज की जा रही है।

2,000 से अधिक तालाबों पर अवैध कब्जे

भूजल के सबसे व्यापक स्रोत माने जाने वाले तालाबों पर भूमाफिया के कब्जों के साथ अतिक्रमण भी है। लखनऊ में 13,037 तालाबों में 2,000 से अधिक तालाबों पर अवैध कब्जे हैं। सबसे ज्यादा तालाब सरोजनीनगर और सदर इलाके में हैं। इसी इलाके में सबसे ज्यादा अवैध कब्जे भी हैं। डीएम अभिषेक प्रकाश ने सभी उपजिलाधिकारियों से उनके इलाकों के तालाबों का ब्योरा मांगा है।

179 ब्लॉक डार्क जोन घोषित

यूपी में पिछले तीन दशक से लगातार भूगर्भ जल का स्तर तेजी से गिर रहा है। हाल यह है कि 179 से अधिक ब्लॉक डार्क जोन (जहां मानक से नीचे चला गया हो पानी) घोषित हो चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश के कुल 820 ब्लॉकों में 639 के जलस्तर में गिरावट आ चुकी है।• एनबीटी, लखनऊ : गंगा के प्रदूषण को कम करने और औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए सीमैप ने गंगा किनारे 10 लाख पौधे लगवाए हैं। संस्थान ने नमामि गंगे प्रॉजेक्ट और वन विभाग के गंगा हरितिमा प्रॉजेक्ट के तहत कानपुर और वाराणसी में तकरीबन 40 हेक्टेअर क्षेत्र में खस के पौधे लगाए हैं। इसके अलावा मॉडल नर्सरी तैयार कर किसानों को अच्छी क्वॉलिटी वाले औषधीय पौधे देकर उन्हें इनकी खेती का तरीका भी बताया जाएगा।

  चीयर्स डेस्क 

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